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स्कूल बस पास के मसले पर राजनीति शुरू

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स्कूल बस पास के मसले पर राजनीति शुरू
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पब्लिक का मसला उठाने का श्रेय लेने को बीजेपी पार्षद भी पहुंचे मंत्री के घर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर के हजारों स्कूली बच्चों के अभिभावकों पर महंगे बस पास का बोझ डालने के बाद अब इस मसले पर राजनीति शुरू हो गई। बस पास की दरों में एकमुश्त 50 फीसदी की बढ़ोतरी का फैसला एचआरटीसी की बीओडी में लिया गया है। एचआरटीसी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में सात में से दो सदस्य शिमला जिले के हैं। एक सदस्य शिमला शहर के भी रहने वाले हैं। फैसले के बाद अब जबकि बच्चों के अभिभावक भड़क गए हैं तो राजनीतिक लाभ के लिए नगर निगम के भाजपा पार्षद भी सक्रिय हो गए हैं। बुधवार सुबह डिप्टी मेयर की अगुवाई में नगर निगम के बीजेपी पार्षद भी शिक्षा मंत्री के घर पहुंच गए और बस पास की दरों में की गई पचास फीसदी बढ़ोतरी वापस लेने का आग्रह किया। इतना ही नहीं, तुरंत फेसबुक पर मंत्री के साथ फोटो भी वायरल कर दिए गए। फेसबुक पोस्ट में लिखा गया ‘शिमला की स्कूल बसों में बढ़ाए गए किराये की दरों को रोकने के लिए शिक्षा मंत्री से आग्रह किया गया है’।
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विधानसभा में गूंजा मामला
माकपा विधायक राकेश सिंघा ने बुधवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के तुरंत बाद प्वाइंट ऑफ ऑर्डर लेते हुए सदन में कहा कि राज्य मंत्रिमंडल के फैसले के बगैर ही सरकार ने शिमला के स्कूली बच्चों पर जबरन टैैक्स थोप दिया है। बच्चों के लिए स्कूल की आवाजाही एकमुश्त 50 फीसदी महंगी कर दी गई है। उन्होंने इस फैसले पर सरकार से जवाब मांगा, मगर इस पर स्पीकर डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि इसके लिए अलग से नोटिस दिया जाए, तभी इस मामले पर चर्चा हो पाएगी। शहर के निजी और कान्वेंट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने मंगलवार को विधायक राकेश सिंघा से मुलाकात कर स्कूल बस पास में मनमाने तरीके से की गई बढ़ोतरी से अवगत करवाया था। राकेश सिंघा ने शहर के अभिभावकों की आवाज विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया था। सिंघा निजी तौर पर इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष भी उठाएंगे।
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