जिले के कुछ क्षेत्रों में सेब और स्टोन फ्रूट के पौधों पर फूल आने का क्रम शुरू
फसल बचाने के लिए बागवान लगा रहे हैं एंटी हेलनेट
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले के कुछ क्षेत्रों में सेब और स्टोन फ्रूट के पौधों में फूल आना शुरू होते ही बगीचों में जालियां (एंटी हेलनेट) लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उद्यान विभाग अप्रैल में एंटी हेलनेट 50 फीसदी अनुदान पर उपलब्ध करवाएगा।
इससे मौसम के विपरीत रहने पर फसल को नुकसान नहीं होगा। कोटखाई, जुब्बल, रोहड़ू और चिड़गांव सहित आसपास के निचले क्षेत्रों के बगीचों में सेब के पौधों पर इन दिनों जालियां लगाने का काम बागवान कर रहे हैं। विकट भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हर वर्ष ओलावृष्टि के कारण करोड़ों की फसल को नुकसान पहुंचता है। इससे कई बार बागवानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिर जाता है। ओलावृष्टि से सेब दागी हो जाता है, ऐसे में मंडियों में भी इसके उचित दाम नहीं मिलते हैं। इसको देखते हुए बागवानों में एंटी हेलनेट लगाने की ओर रुझान बढ़ा है। इस महीने के अंत तक लगभग सभी सेब के बगीचों में फूल आने शुरू हो जाएंगे। जुब्बल के बागवान बिट्टू और रमेश ने कहा कि इस वर्ष फूल आने की प्रक्रिया समय से पहले शुरू हाे गई है। मौसम अनुकूल रहा तो अच्छी फसल की उम्मीद रहती है। ओलावृष्टि से सेब और अन्य फलों को दागी होने से बचाने के लिए एंटी हेलनेट होना जरूरी है। बड़े बागवानों के साथ मध्यम वर्गीय बागवानों ने भी सेब के बगीचों में एंटी हेलनेट लगाना शुरू कर दिया है।
कोट
उद्यान विभाग की ओर से अप्रैल माह में जिले के बागवानों को एंटी हेलनेट अनुदान पर दी जाएगी। इसमें बागवानों को 50 फीसदी तक का अनुदान दिया जाता है। नेट लगाते समय फूलों को नुकसान होता है, उस समय बीमा भी नाजुक होता है। इसलिए सही समय पर ही इस कार्य को बागवान पूरा करें।
-सुदर्शना नेगी, उपनिदेशक, उद्यान विभाग