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कड़ी ट्रेनिंग के बाद ये बने कमांडो, वीआईपी सुरक्षा में होंगे तैनात

Sun, 02 Apr 2017 12:02 AM IST
एसडी शर्मा/अमर उजाला, मैहतपुर (ऊना)
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प्रदेश पुलिस के 47 जवान सात सप्ताह की कड़ी ट्रेनिंग के बाद कमांडो बनकर सेवाएं देने के लिए तैयार हो गए हैं। इन कमांडोज को अब कहीं भी किसी भी विशिष्ट व्यक्ति की निजी सुरक्षा के लिए तैनात किया जा सकेगा। शनिवार को इन कमांडोज की ट्रेनिंग पूरी होने के उपलक्ष्य में आयोजित विदाई कार्यक्रम में पहुंचे पुलिस महानिरीक्षक सशस्त्र पुलिस एवं प्रशिक्षण हिमांशु मिश्रा ने कमांडोज को बधाई देते हुए उनकी पीठ थपथपाई।
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उन्होंने कहा कि यह ट्रेनिंग जीवन भर काम आएगी। इस प्रकार की कड़ी ट्रेनिंग में जवानों की शारीरिक तथा मानसिक क्षमता एवं योग्यता का पता चलता है। कमांडो ट्रेनिंग के लिए कुल 52 जवानों का चयन हुआ था, जिनमें से पांच जवान किन्हीं कारणों से ट्रेनिंग का हिस्सा नहीं बन सके। प्रथम बटालियन बनगढ़ से 3, जुन्गा से 8, सकोह बटालियन से 22 तथा पंडोह से 14 जवानों ने कमांडो ट्रेनिंग हासिल की।

बनगढ़ ने प्रदेश को दिए 124 कमांडो
स्थानीय बटालियन के समादेशक एसआर राणा ने कहा कि बटालियन ने इससे पूर्व भी 77 दिनों की ट्रेनिंग देकर प्रदेश को 77 कमांडो दिए हैं। कमांडो ट्रेनिंग के दौरान मैप रीडिंग, हथियारों का प्रयोग, भागते हुए फायर करना, रात्रि के समय फायर की ट्रेनिंग आदि दी जाती है। 
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कमांडो ने साझा किए अनुभव
सात सप्ताह तक ट्रेनिंग करने वाले कमांडो लखविंदर सिंह ने कहा कि बनगढ़ बटालियन के इन दिनों को वह कभी भी भूल नहीं पाएंगे। शुरू में ट्रेनिंग के दौरान मुश्किल जरूर हुई, लेकिन बाद में सब अच्छा होने लगा। कमांडो रवि कुमार ने कहा कि स्थानीय बटालियन की मैस का खाना तो होटलों के खाने से भी बढ़िया है। उन्होंने कहा कि यहां मनाई होली वह ताउम्र भूल नहीं पाएंगे। 
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कमांडो ट्रेनिंग में सकोह के अनीश अव्वल

प्रथम भारत आरक्षित वाहिनी बनगढ़ में सात सप्ताह तक चली कमांडो ट्रेनिंग के दौरान हर प्रकार के अभ्यास में उम्दा प्रदर्शन करने पर सकोह बटालियन के आरक्षी अनीश कुमार को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया। इसी बटालियन के आरक्षी मनीश ने दूसरा तथा पंडोह के यादव सिंह को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 

पुलिस महानिरीक्षक हिमांशु मिश्रा ने कमांडो ट्रेनिंग लेने वाले प्रशिक्षुओं तथा उनके प्रशिक्षकों को पुलिस विभाग का श्रेष्ठ प्रमाण पत्र सीसी वन देने का ऐलान किया। आरक्षी नवीन शर्मा, यादव सिंह, वासुदेव तथा लखविंदर सिंह को भी सम्मानित किया गया। आरक्षी से कमांडो तैयार करने वाले प्रशिक्षकों निरीक्षक अमरीक सिंह, मुख्य आरक्षी धर्मपाल, सुदेश कुमार, सुमित कुमार, आरक्षी अनिल कुमार, विवेक वर्धन, मुख्य आरक्षी संजीव कुमार, रविंद्र कुमार, मेहर चंद, माइकल, अनिल तथा राकेश कुमार को भी महानिरीक्षक ने सम्मानित किया। 

वीआईपी सुरक्षा कोर्स मेरा प्रिय विषय: हिमांशु 
पुलिस महानिरीक्षक हिमांशु मिश्रा ने कहा कि वीआईपी सुरक्षा कोर्स उनके सबसे प्रिय विषयों में शुमार है। कहा कि इस प्रकार की ट्रेनिंग से हम बहुत सी नई बातें सीखते हैं, जो उम्र भर हमारे काम आती हैं। यूनाइटेड नेशन में भी मैंने ट्रेनिंग के दौरान जो चीजें सीखीं, आज तक काम आ रही हैं।

मिश्रा ने कहा कि इस प्रकार के कमांडोज प्रशिक्षण से अगर पुलिस के जवान 25 फीसदी भी कुछ सीखते हैं, तो यह हमारे लिए बहुत बड़ी कामयाबी की बात है। प्रदेश पुलिस समय एवं संसाधनों की कमी के बावजूद  इस तरह की ट्रेनिंग के जरिये पुलिस बल को इस काबिल बना रही है कि उन्हें किसी भी वक्त किसी भी स्थान पर और किसी की भी निजी सुरक्षा में तैनात किया जा सके।

उन्होंने कहा कि पंजाब के तत्कालीन राज्यपाल जेएफ रिबैरो पर तमाम सुरक्षा इंतजामों को तोड़कर जब आंतकी हमला हुआ था, तब वह खुद की एवं अपनी पत्नी की सुरक्षा इसलिए कर पाए क्योंकि इस तरह की ट्रेनिंग से गुजरे थे। उन्होंने कहा कि बनगढ़ बटालियन की

इस कमांडो ट्रेनिंग से वह भी कई सुखद यादें लिए जा रहे हैं। इस मौके पर समादेशक एसआर राणा, उपसमादेशक भूपेंद्र सिंह, सहायक समादेशक अमित शर्मा, प्रमोद शुक्ला, प्रिंसीपल डाईट देहलां कमलदीप सिंह, डा. रोहित रॉय, शमशेर सिंह, दिलदार सिंह, देवेंद्र सिंह लक्की समेत अनेक लोग मौजूद रहे।
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