आईजीएमसी में अब मरीजों को पानी की कमी नहीं सताएगी। कैंसर अस्पताल के पास प्रबंधन को पानी का प्राकृतिक स्रोत मिला है। प्रबंधन का दावा है कि प्राकृतिक स्रोत से निकलने वाले पानी को अस्पताल की रोजमर्रा जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। प्रबंधन की ओर से इस प्राकृतिक स्रोत से पानी का सैंपल माइक्रो बायोलाजी लैब में भेजा है।
अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि अगर यह सैंपल सही पाया जाता है तो पानी को अस्पताल में इस्तेमाल किया जा सकता है। प्राकृतिक स्रोत के पानी के सैंपल की टेस्टिंग करवाने की पुष्टि वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनक राज ने की है। हाल ही में कैंसर अस्पताल प्रबंधन को पानी बहने के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद अस्पताल के एमएस डॉ. जनकराज और स्टोर इंचार्ज डॉ. राहुल गुप्ता तथा अन्य अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था। प्रबंधन का कहना है कि काफी समय से यहां पर पानी व्यर्थ में बह रहा है। अब इस पानी के सदुपयोग के लिए प्रबंधन कदम उठा रहा है।
अस्पताल की ओर से इस बारे में नगर निगम को भी सूचित किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग को यहां पर टैंक बनाने संबंधी प्रपोजल तैयार करने को कहा है। इस पानी के इस्तेमाल आने से हजारों लोगों को लाभ मिलेगा। लोगों का कहना है कि इस पानी का अगर आईजीएमसी में इस्तेमाल होता है तो नगर निगम की सप्लाई पर बोझ कम हो जाएगा। यहां से बचने वाले पानी को शहर की जनता के लिए सप्लाई किया जा सकता है।
गौरतलब है कि शहर में अक्सर पानी की कमी से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। ऐसे में इस स्रोत का पानी अगर पीने लायक निकलता है तो लोगों को काफी राहत मिलेगी। अस्पताल प्रबंधन खुद भी इस जलस्रोत को लेकर गंभीर है। टेस्टिंग में पानी अगर सही निकला तो इसके बाद इसका इस्तेमाल अस्पताल में किया जाएगा।