जिला सिरमौर के शिलाई, संगड़ाह, रेणुका व राजगढ़ ब्लाक के दुर्गम क्षेत्रों में जागरूकता की भारी कमी है। गरीब परिवारों से संबंधित लोगों को यह भी पता नहीं है कि शादी के लिए लड़के और लड़की की कितनी उम्र होनी आवश्यक है।
पिछले छह माह के भीतर शिलाई तहसील से सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। पिछले पांच साल में बाल विवाह के कुल 79 मामले हो चुके हैं।
ड्राप आउट व गरीबी भी मुख्य कारण
दुर्गम क्षेत्रों में अशिक्षा व जल्द स्कूल छोड़ने के बाद परिजन लड़कियों की शादी रचा रहे हैं। ड्राप आउट भी इसका मुख्य कारण है। लड़कियों के मामले में आज भी कुछ परिजनों की सोच यही है कि उनकी शादी करवाकर भारमुक्त हो जाएं। इसके अलावा गरीबी भी इसकी बड़ी वजह है।
क्या कहते हैं उपायुक्त सिरमौर
उधर, डीसी सिरमौर ललित जैन ने कहा कि ऐसे मामलों में समय-समय पर महिला एवं बाल कल्याण विभाग व चाइल्ड लाइन लोगों को जागरूक कर रहे हैं। साथ ही जिले के दूरदराज क्षेत्रों में और अधिक जागरूकता लाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
वहीं, चाइल्ड लाइन सिरमौर की काउंसलर विनीता ठाकुर ने बताया कि लोगों में जागरूकता लाई जा रही है। चाइल्ड लाइन कई मामलों को ट्रेस आउट कर चुकी है। ऐसे मामलों में मौके पर ही लड़का व लड़की के परिजनों की काउंसलिंग करवाकर जागरूक किया जा रहा है।