जिला शिमला के ठियोग विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले नागजुब्बड़ वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में शिक्षकों के आठ पद रिक्त पड़े हैं। इस कारण स्कूल में शिक्षण कार्य चौपट होकर रह गया है। शिक्षकों के रिक्त पदों पर जल्द तैनाती करने की मांग की है। इस मांग को लेकर लोगों ने बुधवार को ठियोग के विधायक राकेश सिंघा से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने अल्टीमेटम दिया कि तीस अप्रैल से पहले शिक्षकों की तैनाती की जाए अन्यथा आंदोलन शुरू कर स्कूल पर ताला जड़ दिया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल पंचायत उपप्रधान नरेश ठाकुर की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में शिक्षा मंत्री से मिलने भी गया। यहां शिक्षा मंत्री के उपलब्ध न होने पर प्रतिनिधिमंडल ने उनके निजी सचिव को मांगपत्र सौंपा। इसके बाद उन्होंने ठियोग के विधायक राकेश सिंघा से मुलाकात कर समस्या को उठाया और जल्द तैनाती करने की मांग की।
अंत में अभिभावक और पंचायत उपप्रधान ने निदेशक प्रारंभिक शिक्षा रोहित जंबाल से मुलाकात कर उन्हें मांग पत्र सौंपा। शिक्षा निदेशक ने चुनाव आचार संहिता के समय में तैनाती की प्रक्रिया लंबी होने की बात कही। बावजूद इसके उन्होंने अभिभावकों को आश्वस्त किया कि 15 दिन के भीतर स्कूल में विज्ञान के शिक्षक की व्यवस्था कर देंगे। 20 और 25 मई तक स्कूल में अन्य शिक्षकों की व्यवस्था भी कर दी जाएगी।
विधायक राकेश सिंघा ने नागजुब्बड़ स्कूल की इस गंभीर समस्या को लेकर नागजुब्बड़ से आए अभिभावकों और पंचायत उपप्रधान को साथ लेकर शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा अमरजीत कुमार शर्मा से मुलाकात की। उच्च शिक्षा निदेशक ने कहा कि चुनाव आचार संहिता के चलते नागजुब्बड़ स्कूल में अभी नजदीकी स्कूलों से शिक्षकों की अस्थायी व्यवस्था की जाएगी।
150 विद्यार्थी ग्रहण कर रहे हैं स्कूल में शिक्षा
पंचायत उप प्रधान एवं नागजुब्बड़ स्कूल के एसएमसी अध्यक्ष नरेश ठाकुर ने बताया कि स्कूल में पढ़ रहे 150 विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है। कहा कि तीन माह से अभिभावक शिक्षा विभाग के अधिकारियों तथा सचिवालय के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। शिक्षक तैनात न किए तो एक मई से आंदोलन शुरू कर देंगे।
स्कूल में शिक्षकों के यह पद पड़े हैं खाली
नागजुब्बड़ स्कूल में प्रधानाचार्य का पद भी रिक्त पड़ा है। पीजीटी इतिहास, पीजीटी अंग्रेजी, टीजीटी आर्ट्स, टीजीटी साइंस, टीजीटी मैथ और कला अध्यापक के पद भी खाली पड़े हैं। कंदरू पंचायत के साथ लगती तीन पंचायतों का यह एकमात्र स्कूल है। शिक्षकों की कमी के कारण कई छात्र स्कूल छोड़ कर अन्य स्कूलों में प्रवेश लेने को मजबूर हैं।