शहर में दुकानों की नई किराया दरें लागू होने के बाद नगर निगम की कमाई करीब तीन गुना बढ़ने वाली है। अब तक निगम को 987 संपत्तियों से दो करोड़ रुपये की आय हो रही थी। नए किराये के बाद यह कमाई छह करोड़ पहुंचने का अनुमान है। नई दरों से जहां दुकानों का किराया बढ़ जाएगा वहीं, सबलेट की दुकानों से एकसाथ लाखों रुपये मिलेंगे। नगर निगम ने सबलेट की दुकानों को नियमित करने के लिए छह हजार रुपये प्रतिवर्ग फीट की दर तय की है।
इसके अलावा यदि कोई दुकान 500 वर्ग फीट है तो कारोबारी को एकमुश्त नियमितीकरण के तौर पर निगम में 30 लाख रुपये जमा करवाने होंगे। यही नहीं, इनकी मासिक किराया दरें भी बाकी दुकानों से ज्यादा रहेंगी। शहर में ऐसी कई दुकानें हैं जो सबलेट हो चुकी हैं। सबलेट दुकानें चला रहे कारोबारी नई दरों से परेशान हैं। इनका कहना है कि एकसाथ इतना पैसा देना संभव नहीं। पहले दुकान के मालिक को पैसा दिया था, अब निगम को देना पड़ेगा। निगम प्रशासन जनवरी से नए बिल जारी कर किराया वसूली करेगा। इसके लिए दुकानों की बाकायदा नपाई भी की जाएगी।
याचिका की तैयारी में कारोबारी
शहर के कारोबारी निगम के फैसले को चुनौती देने के लिए याचिका भी दायर करने जा रहे हैं। इनका कहना है कि कोर्ट ने निगम से कंपेरेटिव रिपोर्ट भी मांगी है जिससे साफ हो जाएगा कि कब कब शहर में किराया बढ़ा है। हालांकि, कारोबारियों को कोर्ट से किराया बढ़ोतरी के फैसले में बदलाव होने की उम्मीद कम है, लेकिन यह आखिरी प्रयास करना चाहते हैं। व्यापारमंडल के महासचिव संजीव ठाकुर ने कहा कि एक दो दिन के भीतर याचिका दायर करेंगे। छह मार्च को सुनवाई है, ऐसे में कारोबारी कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे।