किले को गोरखा केसल के नाम से भी जाना जाता है। किले का आकार शतरंज के हाथी जैसा है। इस किले का निर्माण हरियाणा की ओर से आने वाली शत्रु सेना पर नजर रखने के लिए किया गया था। इसके अंदर एक कुआं भी है। दंतकथाओं के अनुसार कुएं में अभी भी एक सांप रहता है। ऐसे में उसमें कोई जाने की हिम्मत नहीं करता। यहां पर हर साल कई पर्यटक किले को देखने के लिए पहुंचते हैं। बनासर किले से परवाणू, कालका, पिंजौर, कसौली व डगशाई का सुंदर दृष्य दिखाई देता है। यह किला टिंबर ट्रेल रिजॉर्ट से मात्र तीन किलोमीटर दूर है। किले से एक किलोमीटर दूर करालघाट का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जहां प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। 2008 में वन विभाग ने इस किले के रख-रखाव के लिए योजना तैयार की थी जो अब तक शुरू नही हो सकी है। इसी अवधी में गोरखा सेनापति ने धारों की धार, जोहड़जी, मलोण व सुबाथू किले का निर्माण भी किया था पर अब सभी किले रखरखाव के अभाव में अपना अस्तित्व खोने की कगार पर हैं।