विशेष न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत ने सुनाया फैसला, तीस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया
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वर्ष 2024 में बस अड्डे के पास बरामद किया था चिट्टा अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चिट्टा तस्करी के मामले में अदालत ने दोषी को तीन साल की सजा और तीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। विशेष न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत ने सभी तथ्यों और गवाहों को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया है।
जुर्माने का भुगतान नहीं करने पर दोषी को छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामला 28 जून 2024 को शाम करीब 8:20 बजे का है। शिमला के पुराने बस स्टैंड के पास आटा फ्लोर मिल के निकट पुलिस पार्टी एएसआई पंकज शर्मा की अगुवाई में गश्त कर रही थी। इस दौरान शंकर ठाकुर निवासी रझाणा, शिमला काले रंग के साइड बैग लेकर आया। पुलिस को देखते वह भागने लगा जिससे शक हुआ। पुलिस ने उसे प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के गेट के पास पकड़ लिया। तलाशी के दौरान बैग से 7.170 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) से भरा पारदर्शी पॉलीथीन पाउच बरामद हुआ। मौके पर स्वतंत्र गवाहों को शामिल किया गया। बरामद मादक पदार्थ को सील कर सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं।
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पुलिस ने थाना सदर में एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया। पुलिस के गवाहों और स्वतंत्र गवाह की गवाही पर भरोसा किया गया। स्वतंत्र गवाह ने मुख्य परीक्षा में बरामदगी का समर्थन किया हालांकि क्रॉस में कुछ हिचकिचाहट दिखाई दी लेकिन अदालत ने उसके हस्ताक्षर, सील पैकेट और फोटोग्राफ को देखते हुए गवाही को विश्वसनीय माना। पुलिस गवाहों के बयानों में 15 से 20 मिनट के अंतर को अदालत ने मामूली और स्वाभाविक करार दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे अंतर सच्चे गवाहों में आम होते हैं।
अदालत ने चेन ऑफ कस्टडी के तहत मालखाना, रीसीलिंग, एसएफएसल भेजना और रिपोर्ट सब सही पाए गए। एसएफएसएल रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि पदार्थ डायसिटाइलमॉर्फिन (हेरोइन या चिट्टा) था। आरोपी बचाव में कोई सबूत नहीं पेश कर सका।
जेल में बिताया समय सजा में होगा शामिल
अदालत ने कहा कि जेल में बिताया समय सजा में समायोजित किया जाएगा। बरामद मादक पदार्थ कानून के अनुसार (अपील की अवधि के बाद) नष्ट किया जाएगा। अदालत ने कहा कि नशे की तस्करी समाज के लिए घातक है। खासकर युवाओं के लिए। सजा देते समय आरोपी की उम्र (38 वर्ष), पारिवारिक जिम्मेदारियों और पहली बार अपराध करने को ध्यान में रखा गया। हालांकि नशे की समस्या को देखते हुए पूरी सजा देने की मांग को आंशिक रूप से स्वीकार किया गया।