हिमाचल के आईएएस अधिकारियों का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का मोह अब जयराम सरकार और उसके मौजूदा अफसरों पर भारी पड़ने वाला है। मौजूदा समय में प्रदेश कैडर के 29 आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति या इंटर कैडर डेपुटेशन पर चल रहे हैं। इनमें अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के 8 और प्रमुख सचिव व सचिव स्तर के 14 अफसर शामिल हैं।
31 जुलाई को अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त अनिल खाची भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए प्रदेश से रिलीव हो जाएंगे। सचिव स्तर के दो अधिकारी दिनेश मल्होत्रा और बीसी बडालिया भी रिटायर हो रहे हैं। केंद्र में सेवाएं दे रहे अफसरों में एक भी प्रदेश लौटने का इच्छुक नहीं है।
ऐसे में प्रदेश में शासन चलाने वाले अफसरों का भारी टोटा होने वाला है और इस कमी के बीच काम का सारा बोझ प्रदेश में मौजूद अफसरों पर आना तय है। वर्तमान में प्रदेश में मुख्य सचिव बीके अग्रवाल व प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकांत बाल्दी के अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के 6 अफसर मौजूद हैं, जिनमें वीसी फारका, निशा सिंह और संजय गुप्ता से सरकार न के बराबर काम ले रही है।
लिहाजा, ऐसे में शासन चलाने वाले बाकी अफसरों पर ही खाची, बडालिया और मल्होत्रा के विभागों का अतिरिक्त बोझ आना तय है। सूत्रों का कहना है कि कुछ वरिष्ठ एचएएस अधिकारियों को आईएएस कैडर में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन उससे भी सचिव स्तर के अफसरों की कमी को पूरा करना संभव नहीं है। जाहिर है अब प्रदेश सरकार को अपने अफसराें से काम लेने के तरीके में भी बदलाव करना पड़ेगा।
कुंडू के बाद अन्य पुलिस अधिकारियों पर भी नजर
वैसे तो पिछली सरकारों में भी पुलिस अधिकारी प्रशासनिक कार्य में लगाए जाते रहे हैं, लेकिन सचिवालय में तैनाती की हिम्मत कोई सरकार नहीं उठा सकी। हालांकि, जयराम सरकार मोदी सरकार की तर्ज पर अपने कार्यकाल में नए प्रयोग करने पर विचार कर रही है।
सरकार के सूत्रों की माने तो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजय कुंडू के कई अहम जिम्मेदारियों को शानदार तरीके से संभालने के बाद अन्य पुलिस अधिकारियों को भी शासन में बैठाने पर विचार कर रही है।
सरकार का मानना है कि साफ छवि वाले अफसरों की सरकार के कामकाज में किसी भी रूप में सेवाएं ली जा सकती हैं। अब देखना यह है कि सरकार आने वाले समय में कैसे अफसरों के संकट से निपटती है और अफसरों से कैसे काम लेती है।