समुद्रतल से करीब 18000 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव के दर्शन को हर वर्ष हजारों श्रद्धालु देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचते हैं। 35 किलोमीटर की इस यात्रा में श्रद्धालुओं की मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी रहती है।
श्वास लेने में सबसे अधिक परेशानी भीमडवार से श्रीखंड महादेव तक आती है। मैदानी इलाकों से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस ऊंचाई पर विपरीत परिस्थिति होती है, जिस कारण उन्हें सांस लेने में परेशानी होती है।
अधिक ऊंचाई होने के कारण यात्रियों का यहां सांस फूलने लगता है, वहीं वे आराम न कर लगातार चलते रहते हैं। प्र्रशासन के अनुसार मैदानी इलाकों से आने वाले यात्रियों को यह यात्रा 5 से 7 दिन में पूरी करनी चाहिए और जगह-जगह आराम करना चाहिए।
जिला प्रशासन श्रीखंड यात्रा को सुगम बनाने के लिए हर वर्ष कोई न कोई कार्य कर रहा है। इस यात्रा पर हर वर्ष प्रशासन की ओर से करीब एक करोड़ रुपये का खर्च किया जाता है।
इस वर्ष भी यात्रा को सुगम बनाने के लिए 4 की जगह 5 बेस कैंप, हर बेस कैंप में एक डॉक्टर और दो फार्मासिस्टों की तैनाती की गई थी, लेकिन बावजूद इसके यात्रा में श्रद्धालुओं की मौत का सिलसिला नहीं थम रहा है।
लोगों के अनुसार प्रशासन को चाहिए कि मैदानी इलाकों से आने वाले यात्रियों को तय समय में यात्रा न कर 5 से 7 दिन में यात्रा करवाएं। इसके अलावा वाया फांचा जघोरी होकर जाने वाले यात्रियों पर रोक लगाई जाए।