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हिमाचल में कैंसर का सच जानना नहीं चाहेंगे

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हिमाचल में भी कैंसर के मरीजों में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रदेश में हर साल करीब 2500 लोग कैंसर के चलते अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। साल दर साल ये आंकड़ा बढ़ रहा है। मुंह के कैंसर के सर्वाधिक रोगी सामने आ रहे हैं। तंबाकू सेवन इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।
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इसके अलावा स्तन कैंसर, फेफडे़ और ब्लड कैंसर के भी मरीज बढ़ रहे हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में हर साल कैंसर के 6000 नए मरीज सामने आ रहे हैं। हर साल इनमें बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

आईसीएमआर ने अपनी रिपोर्ट में बीते तीन वर्ष के आंकड़े भी दिए हैं। भारत सरकार ने भले ही यह रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी हो, परंतु प्रदेश स्वास्थ्य विभाग इस रिपोर्ट से अनजान है।
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साल दर साल बढ़ रहे मरीज

वर्ष------------------संख्या
2011------------------5836
2012------------------5966
2013------------------6097

हिमाचल में कैंसर से मौत
वर्ष------------------संख्या
2011----------------2568
2012----------------2625
2013----------------2683
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तंबाकू कैंसर का मुख्य कारण

हिमाचल के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान आईजीएमसी शिमला में कैंसर विभाग के प्रमुख डा. आरके सीम का कहना है कि उनके पास प्रदेश भर से हर साल एक से डेढ़ हजार मरीज आते हैं। उनके अनुसार तंबाकू को प्रदेश में पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाना ही कैंसर से बचाव का एकमात्र उपाय है।

युवाओं को जागरूक करना बेहद जरूरी है। ऐसी स्थिति से 60 फीसदी कैंसर के मरीजों की संख्या में स्वत: ही कमी आ जाएगी। हिमाचल में कैंसर मरीजों का इलाज महज शिमला स्थित आईजीएमसी में ही होता है। यहां भी सभी तरह के कैंसर का इलाज नहीं हो पाता। इसके कारण मरीजों को चंडीगढ़ और दूसरे राज्यों की ओर रुख करना पड़ता है।
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