कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक की जमापूंजी का 25 फीसदी पैसा डिफॉल्टरों के पास फंसा है। ये डिफॉल्टर प्रदेश के बड़े नेताओं के करीबी रहे हैं। बैंक प्रबंधन लोन की रिकवरी के लिए नोटिस पर नोटिस भेज रहा है, लेकिन परिणाम कुछ नहीं आ रहा है। जिन्हें बड़े लोन दिए गए हैं, उनसे पैसा वापस लेना बैंक प्रबंधन के लिए मुश्किल साबित होने लगा है। छोटे लोन के मामलों में तो उपभोक्ता बैंक को किस्तें चुका भी रहे हैं, लेकिन जिन्होंने करोड़ों के ऋण लिए हैं, वह किस्तें चुकाने से आनाकानी कर रहे हैं। इससे बैंक की गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) 22 फीसदी तक पहुंच चुका है। है।
घाटे को पूरा करने के लिए कई बार बैंक प्रबंधन को अपने सालाना लाभांश से पैसा चुकाना पड़ रहा है। एनपीए से बचने और लोन की रिकवरी के लिए बैंक प्रबंधन कई बार वन-टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) स्कीम भी ला चुका है। लेकिन इसका फायदा भी नेताओं और उनके चहेतों ने ही उठाया है। 10 मार्च को बीओडी की बैठक में भी ओटीएस में कई मामले लाए गए हैं। प्रबंध निदेशक और महाप्रबंधक राकेश शर्मा ने कहा कि पहले कुछ लोगों को अत्यधिक ऋण स्वीकृत हुर थे, जो लोग ऋण का भुगतान नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई जारी है।