स्क्रब टायफस बीमारी हिमाचल स्वास्थ्य विभाग के लिए मुसीबत बनती जा रही है। लाख प्रयासों और एडवाइजरी के बावजूद प्रदेश में अब तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी महीने से अब तक 23 मरीजों की मौत हो चुकी है। वहीं, विभिन्न जिलों में करीब साढ़े सात सौ से ज्यादा मरीज इस बीमारी के लिए पाजिटिव पाए गए हैं। विभाग मरीजों को निशुल्क दवा वितरण करने के साथ ही जागरुक करने की कोशिश में जुटा हुआ है।
प्रदेश में स्क्रब टाइफस से मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग पहले ही इसको लेकर अलर्ट जारी कर चुका है। आईजीएमसी व राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कालेज टांडा के अलावा प्रदेश के 12 जिला अस्पतालों को भी बीमारी की संभावना वाले मरीजों की सूचना निदेशालय को देने के साथ ही एंटी स्क्रब टायफस दवा देने के निर्देश जारी कर दिए हैं। सारी कवायद के बावजूद प्रदेश में अभी भी साढ़े सात सौ का आंकड़ा पार कर चुका है।
निदेशक स्वास्थ्य सेवा डा बलदेव कुमार ने बताया कि गाइड लाइंस जारी कर सभी सीएचसी पीएचसी, जोनल व जिला अस्पतालों को कहा गया है कि स्क्रब टायफस की संभावना वाले मरीजों को तत्काल निशुल्क दवा दी जाए। साथ ही उन्हें बीमारी से संबंधित दवाएं भी पहुंचा दी गई हैं। साथ ही कहा गया है कि अगर स्थिति ठीक न लगे तो तुरंत मरीज को सरकारी वाहन से जिला अस्पताल भेजें।
एहतियात बरतने से बच सकती है जान
स्क्रब टायफस बीमारी के लिए स्टेट सर्विलांस अफसर डा राकेश भारद्वाज ने बताया कि ये बीमारी घास व खरपतवार में बैठे पिस्सू से होती है। ऐसे में एहतियात बरतने से इस बीमारी से बचा जा सकता है। कहा कि घास काटने या वहां से गुजरते समय शरीर को पूरी तरह ढककर रखें। इसके अलावा अगर घास में काम किया है तो हाथ पैर अच्छी तरह से पानी से अवश्य धोएं। घर के आसपास भी खरपतवार हो तो उसे उखाड़ दें। चूंकि यह बीमारी चूहों की है और इंसान इसकी चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में चूहों को भी न पनपने दें।
ये लक्षण हों तो तुरंत करें डाक्टर से संपर्क
भारद्वाज ने बताया कि शुरुआती दौर में अगर दवा ले ली जाए तो इस बीमारी से बचा जा सकता है। अनदेखी करने पर बाद में इससे बचना मुश्किल हो सकता है। अगर किसी को सूखी खांसी, बुखार, दाने या गिल्टी जैसी चीजें हों तो तुरंत पास के अस्पताल में संपर्क करें। समय से दवा लेने पर बीमारी से बचा सकता है।