अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहरवासियों को आने वाले समय में पेयजल की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। शिमला शहर को 24 घंटे पानी देने की योजना को आखिरकार सरकार ने मंजूरी दे दी है। इससे न सिर्फ राजधानी बल्कि प्लानिंग एरिया में आने वाले शहर के बाहरी इलाकों में भी पानी की किल्लत खत्म हो जाएगी।
प्रदेश सरकार वर्ल्ड बैंक के साथ सतलुज वाटर प्रोजेक्ट के लिए काम करने को तैयार हो गई है। वीरवार देर शाम मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रदेश सचिवालय में हुई बैठक के दौरान वर्ल्ड बैंक की टीम ने करीब 750 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को लेकर अपनी शर्तें रखीं। इसके बाद फैसला लिया गया कि प्रोजेक्ट को चलाने के लिए अलग कंपनी बनाई जाएगी। इस कंपनी स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) को जल्द ही पंजीकृत किया जाएगा। इसमें बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की भी तैनाती की जाएगी जिसमें मुख्य सचिव, शहरी विकास विभाग, आईपीएच, वित्त विभाग के सचिव के अलावा नगर निगम के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता आदि शामिल किए जाएंगे। सरकार की पहल के बाद वर्ल्ड बैंक भी काम आगे बढ़ाने को तैयार हो गया है। बैंक की टीम अब मार्च में फिर शिमला आएगी।
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दो शर्तें पूरी करते ही जारी 200 करोड़ की पहली किस्त
वर्ल्ड बैंक जल्द ही करीब 200 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी जारी करेगा। लेकिन इससे पहले दो शर्तें पूरी करनी होगी। इनमें पहली एसपीवी कंपनी का पंजीकरण करना और दूसरा शहरवासियों को मीटर रीडिंग पर बिल जारी करना है। एसपीवी पंजीकरण अगले दो माह में पूरा करने की तैयारी है। इसमें बोर्ड ऑफ डायरेक्टर और बाकी स्टाफ की तैनाती शामिल हैं। वहीं, नगर निगम को मीटर रीडिंग पर बिल जारी करने की भी शर्त पूरी करनी होगी। फिलहाल शहर में ज्यादातर मीटर बदले जा चुके हैं। निगम का प्रयास है कि अप्रैल तक बिल जारी करने का काम पूरा शुरू हो जाए। इसके अलावा प्रोजेक्ट के टेंडर संबंधी प्रक्रिया भी शुरू होनी है। अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल ने कहा कि प्रोजेक्ट से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
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औपचारिकताएं पूरी करने में जुटे अधिकारी
नगर निगम शिमला शहर के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूरा करने में जुट गया है। शिमला ग्रेटर वाटर सर्कल के अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल और उनकी टीम शुक्रवार को भी सचिवालय पहुंची। यहां प्रोजेक्ट को लेकर औपचारिकताएं पूरी की जा रही है। वीरवार देर रात करीब नौ बजे तक चली बैठक के दौरान जो शर्तें और औपचारिकताएं पूरी होनी हैं, उसके लिए सरकार स्तर पर भी पहल हो रही है। उम्मीद है कि अगले छह माह में प्रोजेक्ट को लेकर पहली किस्त मिल जाएगी।