आईजीएमसी में डीएसए मशीन लगाने की कवायद शुरू
इंटरवेशन रेडियोलॉजी सेक्शन का काम जोरों पर, मशीन के लगने से दिमागी बीमारियों का इलाज हो जाएगा सरल
8.5 करोड़ की मशीन लगाने को मिल चुकी है मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में जल्द ही डीएसए मशीन स्थापित कर दी जाएगी। इस मशीन के लगने से लीवर ट्यूमर और दिमाग की बीमारियों का इलाज सरल हो जाएगा। अब तक मरीजों को इस सुविधा के लिए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया जाता रहा है। आईजीएमसी में यह मशीन स्थापित होने के बाद लोगों को यहां महंगे खर्च से निजात मिलेगी वहीं आने जाने की परेशानी से भी राहत मिल जाएगी।
आईजीएमसी के रेडियोलॉजी विभाग में इंटरवेशन रेडियोलॉजी सेक्शन स्थापित होगा। इस सेक्शन को स्थापित करने का काम आजकल जोरों पर है। इसी सेक्शन में डिजिटल सब स्ट्रेक्शन एंजियोग्राफी मशीन (डीएसए) लगाई जाएगी। इस मशीन से लिवर में ट्यूमर और अधरंग होने पर बंद हुई दिमाग की नस को बिना ऑपरेशन के ठीक किया जा सकेगा। मशीन लगाने के लिए विधानसभा के बजट सत्र में लाए प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में अब मशीन खरीद को लेकर फाइनेंशियल अप्रूवल के बाद जल्द मशीन स्थापित हो जाएगी।
राज्य के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 8.5 करोड़ रुपये की लागत से डीएसए मशीन लगाई जानी है। मशीन के लगने के बाद लिवर के ट्यूमर को खून की नली द्वारा पहुंचने वाली सप्लाई को रोका जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि इससे ट्यूमर बढ़ेगा नहीं और इसे सूखाकर जल्द निकाला जा सकेगा। इसके अलावा जिन मरीजों की अधरंग के कारण दिमाग की नस बंद हो गई है उसे खोलने में भी यह मशीन मददगार साबित होगी। इस प्रक्रिया में टांग की नस में चीरा लगाकर वहां से एक नली डाली जाती है। यह नली दिमाग की नस तक पहुंचाने के बाद ब्लॉकेज को खोला जाता है। विभाग का कहना है कि इस मशीन के लगने के बाद सूबे के मरीजों को फायदा होगा। इस तकनीक से होने वाले इलाज के लिए मरीजों को बाहरी राज्यों में भी नहीं जाना होगा।