अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के साथ ही नगर निगम में मनोनीत पार्षदों को लेकर लॉबिंग का दौर शुरू हो गया है। भाजपा के कई पूर्व पार्षद और इस बार निगम चुनाव जीतने में नाकाम रहे प्रत्याशी मनोनयन के जरिये सदन में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
जून माह में हुए नगर निगम के चुनाव से लेकर अब तक सदन में मनोनीत पार्षदों के पद खाली चल रहे हैं। पहली बार सदन में पांच मनोनीत पार्षदों का चयन किया जाना है। अब तक सदन में तीन पार्षद ही मनोनीत होते रहे हैं। अब नगर निगम में वार्डों की संख्या 25 से 34 होने के बाद मनोनीत पार्षदों की संख्या भी बढ़ जाएगी। सत्तारूढ़ पार्टी होने के नाते अब भाजपा तय करेगी कि किसे सदन में भेजना है। वहीं, चुनावी रोस्टर बदलने के कारण इस बार कई पूर्व पार्षद चुनाव नहीं लड़ पाए थे। इनके वार्ड या तो आरक्षित हो गया या फिर महिला प्रत्याशी को मैदान में उतारना पड़ा। ऐसे में चुनाव लड़ने से वंचित रहे पूर्व पार्षद सरकार से मिलकर मनोनीत करने के लिए नेताओं के दरबार में हाजिरी लगाने जा रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि सीएम पद पर फैसला होते ही भाजपा इन पार्षदों के मनोनयन को लेकर भी जल्द कोई फैसला लेगी।
---
मनोनीत पार्षद को मिलती हैं ये सुविधाएं
मनोेनीत पार्षद को प्रतिमाह चार हजार रुपये निगम भत्ता दिया जाता है। इसके अलावा 700 रुपये फोन के भी मिलते हैं। मनोनीत पार्षद को सदन में वोट का अधिकार नहीं होता। लेकिन बाकी पार्षदों की तरह वह अपने वार्ड में लाखों रुपये के काम करवा सकता है। नगर निगम बाकायदा उसके तैयार प्रस्ताव के लिए बजट देता है।
---
डिप्टी मेयर के पद को लेकर अटकलें तेज
नगर निगम में डिप्टी मेयर के पद को लेकर भी अटकलों का दौर तेज हो गया है। वर्तमान में राकेश शर्मा डिप्टी मेयर हैं। उन्होंने पंथाघाटी वार्ड से बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव जीता है। निगम में सरकार बनाने के लिए भाजपा ने उन्हें डिप्टी मेयर का पद दे दिया था, लेकिन बाद में पार्षद संजय परमार के भाजपा में शामिल होने से अब पार्टी के पास बहुमत का पूरा आंकड़ा हैै। वहीं, पार्षद शैलेंद्र चौहान समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पार्षद डिप्टी मेयर की दौड़ में आगे हैं। पार्टी में अभी से भाजपा के ही किसी पार्षद को यह पद सौंपने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। देखना रोचक होगा कि नई सरकार कोई बदलाव करती है या नहीं।