बौद्ध भिक्षुओं ने स्पीति के चिचम गांव से पदयात्रा आरंभ की है। भिक्षु तिब्बत सीमा से सटे परांगला दर्रा को पारकर पारछू नदी को छूकर लद्दाख के कोरजोक पहुंचेंगे। पदयात्रा के पहले दिन 4260 मीटर ऊंचे किब्बर गांव से भिक्षु स्पीति के अंतिम गांव धुमले पहुंचे।
यहां पर परांगला दर्रा सामने दिखाई पड़ता है। दूसरे दिन धुमले से थलटक की तरफ रवाना होंगे। खराब मौसम के बीच इस इलाके में बर्फबारी की संभावना हमेशा बनी रहती है।
लिहाजा, यह पदयात्रा जितनी रोमांचक है, उतनी ही खतरों से भरा हुआ। पारछू नदी इसी परांगला दर्रा से निकल कर तिब्बत और फिर भारत में प्रवेश करती है। इस पदयात्रा के दौरान भिक्षुओं को हर रोज 5 घंटे का सफर तय करना होगा। 20 जुलाई को इक्को पदयात्रा का समापन होगा।