शहर में पानी के सैंपल फेल होने से मचे हड़कंप के बीच अब आईजीएमसी प्रशासन ने पेयजल कंपनी के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सैंपल फेल होने को लेकर अब तक पेयजल कंपनी आईजीएमसी की सैंपलिंग व्यवस्था पर सवाल उठाती रही है। लेकिन आईजीएमसी प्रशासन का कहना है कि सिर्फ उनके लिए सैंपल ही फेल नहीं हो रहे। इसमें कुछ ऐसे भी सैंपल हैं जो पेयजल कंपनी भेज रही है, वे भी फेल हुए हैं। एक साल का रिकॉर्ड देखें तो आईजीएमसी से ज्यादा कंपनी और एमसी के लिए हुए सैंपल ही फेल हुए हैं।
कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. बलराज ने साफ किया कि सैंपल फेल होने का ठीकरा अकेले आईजीएमसी पर फोड़ना सही नहीं। कहा कि शहर में सप्लाई किया जा रहा पानी पीने योग्य है और सिर्फ पांच फीसदी से कम सैंपल फेल हुए हैं। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। बताया कि जो सैंपल फेल हुए हैं, आईजीएमसी उनकी दोबारा जांच करता है कि यह किन कारणों से खराब आए हैं। फेल सैंपलों में हेपेटाइटिस ए या ई नहीं पाया गया है। कहा कि यह नियमित सैंपलिंग का ही नतीजा है कि इस बार पीलिया के मामले सामने नहीं आए हैं।
सैंपल लेने वालों की दोबारा होगी ट्रेनिंग
पेयजल सैंपल फेल होने के मामले पर मंगलवार को नगर निगम आयुक्त पंकज राय ने पेयजल कंपनी और आईजीएमसी की टीम के साथ बैठक भी की। इसमें फैसला लिया गया कि सैंपल लेने वाले कर्मचारियों को दोबारा ट्रेनिंग दी जाएगी। सैंपल कंपनी के जेई की मौजूदगी में ही लिए जाएंगे। कंपनी के एमडी धर्मेंद्र गिल ने अश्वनी खड्ड से पानी लिफ्ट किए जाने की अफवाहों पर कहा कि साल 2016 से अश्वनी खड्ड का पानी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। कंपनी कोटी बरांडी का पानी लिफ्ट कर रही है। आयुक्त पंकज राय का कहना है कि जल्द आईजीएमसी के डॉक्टर इस मामले पर मीडिया के माध्यम से लोगों को सच्चाई बताएंगे। बैठक में आईजीएमसी के कम्यूनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. बलराज, माइक्रोबायोलाजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. सांत्वना वर्मा और सीएचओ डॉ. सुरेखा चोपड़ा भी मौजूद रहीं।
आईजीएमसी 12, कंपनी लेती है आठ सैंपल
शहर में पेयजल के रोजाना 20 सैंपल भरे जाते हैं। इनमें 12 सैंपल कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग और आठ कंपनी भरती है। शहर में पीलिया फैलने के बाद साल 2016 में आईजीएमसी के कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग ने इसके कारणों का पता लगाने की मुहिम शुरू की थी। इसी के तहत साल 2018 से विभाग खुद शहर में पानी की सैपलिंग कर रहा है।