यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित शिमला-कालका रेलवे ट्रैक पर जल्द ही ट्रेनें 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी। स्पीड बढ़ने के बाद शिमला से कालका की 96 किलोमीटर दूरी 5 से घटकर 4 घंटे में पूरी होगी। ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन) द्वारा किया गया ट्रायल सफल रहा है। 10 दिन का ट्रायल शेड्यूल पूरा होने के बाद शुक्रवार को 12 सदस्यीय टीम वापस लखनऊ लौट गई। टीम अब आरडीएसओ के निदेशक को ट्रायल की रिपोर्ट सौंपेगी।
आरडीएसओ निदेशक रेलवे बोर्ड को रिपोर्ट सौंपेंगे। औपचारिकताएं पूरी होने में करीब पंद्रह दिन लगेंगे जिसके बाद रेलवे बोर्ड स्पीड बढ़ाने पर फैसला लेगा। आरडीएसओ की टीम बीते दस दिन से शोघी और शिमला के बीच 25 से बढ़ाकर 35 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रायल कर रही थी। ट्रायल लोको 706 में सेंसर, स्पीडोमीटर और कंट्रोलर लगा कर स्पीड के अलावा इंजन में कंपन का भी आंकलन किया गया।
सूत्र बताते हैं कि 35 किलोमीटर की रफ्तार से ट्रायल सफल रहने के बावजूद यात्री सुरक्षा के मद्देनजर स्थायी तौर पर गाड़ियों की रफ्तार 30 किलोमीटर प्रतिघंटा तक ही बढ़ाई जाएगी। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल के आदेशों पर गाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने के लिए ट्रायल किया गया है।
रेलवे बोर्ड लेगा स्पीड पर फैसला : बजाज
ट्रायल पूरा होने के बाद आरडीएसओ की टीम वापस लखनऊ लौट गई है। यह टीम डायरेक्टर आरडीएसओ को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी जिसके बाद रेलवे बोर्ड कालका-शिमला सेक्शन पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने से संबंधित फैसला लेगा।- डीके बजाज सहायक मंडल अभियंता, अंबाला मंडल
जनवरी में कोच के साथ होगा अब ट्रायल
आरडीएसओ की टीम जनवरी में दोबारा शिमला आएगी। 10 जनवरी के बाद इंजन में कोच जोड़कर हाई स्पीड ट्रायल किए जाएंगे। पहले चरण में टीम ने इंजन को ही 35 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ा कर ट्रायल किया है।
30 की स्पीड में ब्रेकिंग टेस्टिंग सफल
शिमला से शोघी की ओर 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से इंजन दौड़ा कर इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम ट्रायल भी सफल रहा है। अचानक गाड़ी रोकने के लिए ब्रेक लगाने पर प्रतिक्रिया जांचने के मकसद से यह ट्रायल किया गया था।