शिमला। फेस्टिवल सीजन में खाद्य आपूर्ति महकमे का औचक निरीक्षण महज औपचारिकता बनकर रह गया है। सोमवार दोपहर बाद लोअर बाजार से निरीक्षण शुरू हुआ। लेकिन शिमला जैसे बड़े शहर में बिना स्थानीय इंस्पेक्टर के कारण टीम पूरी तरह बेबस सी नजर आई। एक तरफ टीम निरीक्षण कर रही थी, दूसरी तरफ दुकानदार रेट लिस्ट लगा रहे थे।
जानकारी के मुताबिक खाद्य महकमे ने सोमवार को इंस्पेक्टरों की एक टीम को बाजार में निरीक्षण के लिए भेजा, जिससे पता लग सके कि कहीं ज्यादा वसूली तो नहीं रही। जैसे ही टीम निरीक्षण करने सब्जी मंडी पहुंची। यहां फल व सब्जी विक्रेताओं से रेट लिस्ट और बिलों को लेकर पूछताछ की। लेकिन दूसरी ओर टीम के आने की सूचना आग की तरह फैल गई। दुकानदारों ने पक्के बिल तो दूर की बात, सबसे पहले दुकानों में रेट लिस्ट पर फल व सब्जियों के दामों को लिखने शुरू कर दिए। जिस दुकानदार के पास गत्ता और कोई और चीज हाथ लगी, वह उस पर ही रेट लिखने लगा। इसके अलावा इस सूचना पट्ट पर बाकायदा अपना नाम व हस्ताक्षर तक कर डाले। वहीं दूसरी ओर निरीक्षण करने आए इंस्पेक्टर तक को कानों कान तक खबर नहीं लग पाई।
शहर में महकमे की टीम ने किए 42 निरीक्षण
खाद्य महकमे की टीम ने शहर में 42 निरीक्षण किए हैं। अलग अलग टीमों ने 12 घरेलू सिलेंडरों को ढाबों से जब्त किया है। इसके अलावा आठ क्विंटल सतर किलो फल और सब्जियों के अलावा 20 किलोग्राम पनीर भी जब्त किया है। आगामी दिनों में भी निरीक्षण की प्रक्रिया जारी रहेगी।
- पुरुषोत्तम सिंह, जिला नियंत्रक खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले
चिकन के रेट भी वसूले जा रहे अधिक
टीम सब्जी मंडी में निरीक्षण के दौरान मीट शॉप में पहुंची। इस दौरान मीट शॉप में चिकन का रेट अधिक दर्शाया गया था। इस पर महकमे के इंस्पेक्टर ने संचालक से एक्सट्रा चार्ज को लेकर पूछताछ की तो संचालक ने कहा जनाब यही रेट फाइनल हुआ है।
जनाब आढ़ती नहीं देते हैं पक्के बिल
पक्के बिल को लेकर इंस्पेक्टरों ने फलों व सब्जियों की दुकानदारों से बिल के बारे में जानना चाहा तो दुकानदारों ने कहा कि जनाब आढ़ती हमें पक्के बिल नहीं देते है, हम क्या करें। आपको कच्चे बिल ही दिखा सकते हैं।