अप्रैल 2018 में स्कूल शिक्षा बोर्ड की अफसरशाही को फॉर्चूनर की सवारी का इतना अधिक शौक था कि गाड़ी को खरीदने से पहले सरकार से मंजूरी लेना भी जरूरी नहीं समझा था। करीब 35 लाख की फॉर्चूनर खरीदने के बाद बोर्ड के अफसरों के ठाठ यहीं पर खत्म नहीं हुए थे।
लक्जरी गाड़ी खरीदने के बाद अफसरों ने करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च कर वीआईपी नंबर भी लिया था। मामला राज्य सचिवालय पहुंचने के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने जांच बैठाते हुए उस फॉर्चूनर को अपने बेड़े में शामिल कर लिया था। बोर्ड को नया अध्यक्ष मिलने के बाद वो फॉर्चूनर वापस धर्मशाला भेजी गई।