प्रदेश उद्यान विभाग में बागवानी विकास अधिकारियों के 172 पद रिक्त हैं। ऐसी स्थिति में प्रदेश के लाखों बागवानों तक कैसे आधुनिक बागवानी तकनीक पहुंचाई जा सकेगी। राज्य में इस वक्त विश्व बैंक की वित्तीय मदद से करोड़ों के बागवानी विकास प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं। तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण कैसे बागवानों को लाभ पहुंचाया जा सकेगा।
बागवानों को प्रदेश में चलाए जा रहे बागवानी विकास के प्रोजेक्टों का पूरा लाभ प्रदेश के गांव- गांव तक पूर फायदा नहीं पहुंच रहा है। बागवानी विभाग में सिर्फ 25 फीसदी तकनीकी स्टाफ तैनात कर रखा है। इससे विभाग का काम भी प्रभावित हो रहा है। सरकार ने बागवानी विभाग में बागवानी विकास अधिकारियों के 264 पद सृजित किए हैं। इनमें सिर्फ 92 पदों को ही भरा जा सका है।
विश्व बैक की मदद से 1134 करोड़ का बागवानी विकास प्रोजेक्ट चलाया हुआ है। एडीबी की वित्तीय मदद से 1688 करोड़ का सब ट्रापिकल हार्टिकल्टर प्रोजेक्ट चल रहा है। 423 करोड़ का समेकित मशरूम विकास प्रोजेक्ट और 150 करोड़ की पुष्प क्रांति योजना। 10 करोड़ की मधु विकास योजना आदि बागवानों के लिए चलाए जा रहे हैं। इनको सफलतापूर्वक चलाने के लिए बागवानी विकास अधिकारियों की जरूरत है।
क्या कहते हैं आफिसर एसोसिएशन अध्यक्ष
प्रदेश बागवानी ऑफिसर एसोसिएशन संघ के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र ठाकुर कहते हैं कि विभाग में 264 पद एचडीओ के सृजित हैं। इनमें अभी तक सिर्फ 25 फीसदी पद यानी 92 पदों को भरा जा सका है। ये पद न भरने से बागवानों को बागवानी विकास की योजनाओं का पूरा फायदा नहीं मिला है। सरकार से ये पद भरने की मांग उठाई जाती रही है।