आप पति-पत्नी दोनों नौकरी या मजदूरी करते हैं और बच्चा छोटा है तो उसकी देखभाल की टेंशन छोड़ दें। आपकी मदद करेगा महिला एवं बाल विकास निदेशालय। निदेशालय और भवन एवं अन्य निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में शिमला शहर में आंगनबाड़ी एवं क्रैच खोल है।
आप इसमें अपना बच्चा देखभाल के लिए छोड़ सकते हैं। वीरवार को प्रदेश बाल कल्याण परिषद की महासचिव पायल वैद्य ने आरटीओ के पास इस आंगनबाड़ी एवं क्रैच का शुभारंभ किया।
पायल वैद्य ने कहा कि इससे समाज के गरीब वर्ग के लोगों, कामगार मजदूरों के बच्चों और स्थानीय कामकाजी महिलाओं के बच्चों को फायदा मिलेगा। उन्हाेंने विभाग की ओर से चलाए जा रहे प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख शिक्षा पाठ्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों में बच्चों के साथ भाग लिया।
केंद्र में आंगनबाड़ी सेवाओं के अतिरिक्त यहां से नजदीक मल्टी स्टोरी पार्किंग एवं आईपीएच परिसर के निर्माण कार्यों से जुड़ी माताओं के छह वर्ष तक की आयु के बच्चों को प्रतिदिन आठ घंटे के लिए ‘डे केयर सर्विसिज’ सेवाएं मिलेंगी। इसके अलावा केंद्र में पूरक पोषाहार, टीकाकरण, प्रारंभिक बाल्यावस्था
देखरेख, शिक्षा पाठ्यक्रम आधारित अनौपचारिक शिक्षा, खेल गतिविधियां और स्वास्थ्य जांच सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास के संयुक्त निदेशक आरएस गुलेरिया, डीपीओ ईरा तनवर और सीडीपीओ ममता पाल मौजूद रहीं।
क्रैच में तीन बार मिलेगा पोषाहार
क्रैच में बच्चों के सोने एवं आराम करने के अलावा प्रतिदिन तीन बार पूरक पोषाहार देने का प्रावधान किया गया है। यहां वह तमाम सुविधाएं होंगी जो एक छोटे बच्चे के लिए जरूरी है। इस केंद्र के शुरू होने से शिमला शहर के ऐसे अभिभावकों बड़ी राहत मिली है जो दोनों नौकरी करते हैं।