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सरकार से शहर के जंगल वापस लेगा नगर निगम

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शिमला। शहर के जंगल अब नगर निगम अपने कब्जे में लेगा। वार्डों में महीनों से गिरे पेड़ न उठने के बाद नगर निगम ने सदन में प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेज दिया है। सरकार से शहर के जंगल वापस नगर निगम के हवाले करने की मांग की गई है।
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मासिक बैठक के दौरान शहर में खतरनाक पेड़ों को न काटने और महीनों पहले गिरे पेड़ों को न हटाने को लेकर पार्षदों ने सवाल उठाए। नाभा वार्ड पार्षद सिमी नंदा ने पूछा कि आखिर खतरनाक पेड़ चिन्हित करने के बावजूद निगम और वन विभाग इन्हें क्यों नहीं हटा रहे। पार्षद दिवाकर शर्मा ने कहा कि उनके वार्ड में कई पेड़ महीनों से रास्ते पर पडे़ हैं, लेकिन वन विभाग इन्हें काटने तक की जहमत नहीं उठा रहा। पार्षदों ने वन विभाग के अफसरों को भी बैठक में बुलाने के लिए प्रशासन पर दबाव डाला। बाद में वन विभाग के डीएफओ बैठक में पहुंचे। पार्षदों ने पूछा कि आखिर गिरे हुए पेड़ क्यों नहीं हटाए जा रहे हैं। साथ ही जो पेड़ भवनों के लिए खतरा बने हैं, उनको काटने के लिए कितना समय चाहिए। इस पर डीएफओ ने कहा कि गिरे हुए पेड़ उठाने के लिए कैबिनेट से मंजूरी लेनी जरूरी है। इसका प्रस्ताव भेजा है और अनुमति मिलते ही इन्हें हटा दिया जाएगा। वहीं, जहां तक खतरनाक पेड़ों को काटने की बात है तो इसके लिए एनजीटी की अनुमति चाहिए। कहा कि 2016 में 77 और 2017 में 274 पेड़ों की सूची सरकार को भेजी थी, जिनपर अभी अनुमति नहीं मिली है।

अनुमति मिली तो निगम को होगा फायदा
करीब पांच साल पहले तक शहर के जंगल नगर निगम के अधीन थे। बाद में सरकार ने इसे अपने अधीन ले लिया था। यदि सरकार शहर के जंगल नगर निगम के हवाले करता है तो इससे निगम को कई फायदे होंगे। एक तो लोगों को राहत देने के लिए गिरे पेड़ तुरंत कटवा सकेंगे। दूसरा गिरे हुए पेड़ की इमारती लकड़ी बेचकर निगम पैसा भी कमा सकता है।
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