अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। आठ बजे ब्यूलिया स्कूल में मतदान प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। कांग्रेस और भाजपा के पार्टी कार्यकर्ता अपने-अपने कुर्सी टेबल लगा चुके थे। हाथों में वोटिंग लिस्ट लेकर मतदाताओं के इंतजार में बैठे थे। मतदाता पहुंचे तो नंबर के साथ पर्चियां बांटी। जिन्होंने नहीं ली तो उन्हें आवाज देकर पर्ची देने लगे। इस पर लोगों ने निर्वाचन विभाग की ओर से दी गई लिस्ट दिखाकर अपना नंबर साथ होने की बात कही। इस पर पास खड़े लोगों ने खूब ठहाके लगाए।
सुबह के साढ़े नौ बजे अमर उजाला की टीम भी लाइनों में लोगों के साथ माहौल समझने के लिए खड़ी हो गई। लोग प्रत्याशियों को वोट देने की बात कर रहे थे कि एक ने कह दिया कि यहां पर मुकाबला रोचक है। भाजपा, कांग्रेस और माकपा के जो प्रत्याशी खड़े किए हैं, वे तीनों ही राजपरिवार से हैं। तीनों ही एक-दूसरे की वोट काटेंगे। जो भी जीतेगा उसकी जीत का मार्जन काफी कम होगा। इस बीच एक अन्य व्यक्ति कहता है कि आजाद प्रत्याशी मदन मोहन की भी क्षेत्र में पकड़ है। लेकिन, इस बातचीत के बीच वाक्या घट गया। एक व्यक्ति जो बीच में से वोट डालने के लिए अंदर जाने की कोशिश कर रहा था। स्थानीय बुजुर्ग ने पकड़ लिया। वह व्यक्ति कहता है कि उसे जाने दो उसे चंडीगढ़ जाना है। इस बात पर बौखलाकर स्थानीय बुजुर्ग ने कह दिया हामै भी बड़ी दैरी दो लाइनों दै खड़े (हम भी काफी देर से लाइनों में खड़े हैं) है। आप भी थोड़ा इंतजार करें। पुलिस ने इस गहमागहमी के बाद पुरुष, महिला और सीनियर सिटीजन के लिए अलग-अलग लाइनें लगा दीं। इसके बाद टीम मैहली बूथ पर पहुंची। यहां कांग्रेस और आजाद प्रत्याशी के समर्थक गेट पर ही अपने अपने उम्मीदवारों के लिए वोट की अपील करते नजर आए। जबकि कसुम्पटी और विकासनगर सहित आसपास के बूथों पर इस तरह की वोट अपील नहीं की गई।