1600 कर्मचारियों वाले हिमाचल सरकार के सचिवालय में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की सिफारिशों पर चल रहे विवाद के कारण पिछले 6 महीने से प्रमोशन अटकी हुई है।
सचिवालय प्रशासन विभाग (एसएडी) ने अनुभाग अधिकारियों और अधीक्षकों की प्रमोशन लिस्ट जारी की थी। इस पर आरक्षित वर्गों के कर्मचारियों ने ये कहते हुए आपत्ति उठाई थी कि कैटागिरी में रोस्टर प्वाइंट के अनुसार लाभ नहीं दिया गया।
ये रिप्रजेंटेशन एसएडी में लंबित है। इस पर फैसला होने तक नई प्रमोशन भी नहीं हो रही। यदि एसएडी ने रिव्यू पर फैसला लेना है तो इससे वरिष्ठता सूची में भी बदलाव होना संभावित है।
इस कारण इस सारे विवाद में नई प्रमोशन फंस गई है। इधर, सचिवालय की चुनी हुई एसोसिएशन पर कर्मचारियों की ओर से प्रमोशन बहाल करवाने के लिए दबाव लगातार बढ़ रहा है।
कई कर्मचारी बिना प्रमोशन के रिटायर हो रहे हैं। एसोसिएशन इस मसले पर मुख्य सचिव और एसएडी सचिव से मिलकर भी उठा चुकी है। एसएडी ने अपने स्तर पर कुछ बैठकें भी की हैं, लेकिन अब तक फैसला नहीं हो पाया है।
गलती की सजा कर्मचारियों को क्यों?
हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवाएं कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा का कहना है कि डीपीसी रिव्यू पर फैसला न होने के कारण ये विवाद बढ़ा है। ये गलती एसएडी की है।
एसएडी या तो रिव्यू पर समयबद्ध फैसला ले या फिर कर्मचारियों को देय प्रमोशन एडहॉक आधार पर दे दे, ताकि किसी के हित प्रभावित न हों। कर्मचारी संगठन हर स्तर पर इस मामले को उठा चुका है।