तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने हाईकोर्ट की ओर से लगाई गई पेनल्टी न भरने पर 16 पोलीटेक्निक कॉलेजों की एफिलिएशन रद कर दी है। कोर्ट ने कुल 21 संस्थानों पर पेनल्टी लगाई थी, लेकिन पांच ने ही पेनल्टी की राशि जमा करवाई थी।
तकनीकी शिक्षा मंत्री जीएस बाली ने ये जानकारी प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के पास अब तीन विकल्प हैं। या तो पेनल्टी भरें, दोबारा हाईकोर्ट जाकर राहत मांगें या फिर फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएं।
इन संस्थानों पर हुई कार्रवाई
जिन संस्थानों पर कार्रवाई हुई है, उनमें गौतम गर्ल्स बहु तकनीकी संस्थान हमीरपुर, देवस्य वुमन संस्थान हमीरपुर, केसी बहु तकनीकी संस्थान पंडोगा, देवभूमि बहु तकनीकी संस्थान हरोली, शिवालिक बहु तकनीकी संस्थान बढेहड़ा ऊना, ड्रीम बहुतकनीकी संस्थान खिलड़ा सुंदरनगर, शिरडा बहु तकनीकी संस्थान कनैड सुंदरनगर, हिमालयन बहु तकनीकी संस्थान जाबली सोलन, नटराज बहु तकनीकी संस्थान राजवणी मंडी, एआईटी संस्थान नालागढ़, बैष्णव संस्थान ठपकौर, बैल्ज संस्थान शिमला, अभिलाषी संस्थान चैलचौक मंडी और दो अन्य संस्थान शामिल हैं। उधर, हिमाचल प्रदेश निजी तकनीकी संस्थान एसोसिएशन के अध्यक्ष रजनीश बंसल और सचिव भूपिंद्र शर्मा ने कहा कि बोर्ड का फैसला संस्थानों के साथ-साथ इनमें पढ़ रहे बच्चों के साथ भी अन्याय है।
बच्चों के लिए संस्थान जिम्मेदार
जीएस बाली ने कहा कि इन संस्थानों ने न तो पेनल्टी भरी, और न ही सरकार की ओर से मांगी गई सूचनाएं सही दीं। इनमें 2009 से 2012 तक के बैच का रिजल्ट 35 फीसदी और 2010 से 13 बैच का रिजल्ट 25 फीसदी रहा था।
सरकार ने फैसला लिया था कि 50 फीसदी पेपर पास करने वाले विद्यार्थी को ही अगली कक्षा में दाखिला मिलेगा। पर कई निजी संस्थानों ने इसकी अवहेलना की। अब इनमें पढ़ रहे बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी भी इन्हीं संस्थानों की होगी।
ऐसे शुरू हुआ था सारा विवाद
सरकार ने पोलीटेक्निक में एडमिशन के लिए जमा दो में 60 फीसदी अंकों की शर्त रखी थी। इसके खिलाफ कुछ संस्थान इस तर्क के साथ हाईकोर्ट गए कि एआईसीटीई के मानदंड 35 फीसदी के हैं।
कोर्ट ने इस आधार पर एडमिशन के निर्देश तो दे दिए लेकिन साथ ही कहा कि जिन्होंने गलत एडमिशन की हैं, उन्हें 2.58 करोड़ पेनल्टी लगेगी। आधी पेनल्टी तकनीकी शिक्षा बोर्ड में जमा करवाने को कहा गया। 16 संस्थानों ने अब तक ये पेनल्टी जमा नहीं करवाई है।