अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। बरसात शुरू होते ही शहर में गंदे पानी की सप्लाई भी शुरू हो गई है। राजधानी के कई स्टोरेज टैंकों और सार्वजनिक नलों से लिए गए पेयजल सैंपल जांच में फेल हो गए हैं।
आईजीएमसी की जांच रिपोर्ट के अनुसार ढींगूमाता मंदिर टैंक, ढली टैंक, फेज तीन टैंक और जाखू रोपवे टैंक से लिए गए पेयजल सैंपल की रिपोर्ट सही नहीं आई है। इन टैंकों से पांच जुलाई को सैंपल भरे गए थे। सात जुलाई को इनकी रिपोर्ट आई है। इन चारों टैंकों से हजारों लोगों को पीने के पानी की सप्लाई होती है। पहली बारिश के बाद परियोजनाओं में आई गाद के कारण पानी दूषित हुआ है। परियोजनाओं से टैंकों में पहुंचे मटमैले पानी की कंपनी ने लोगों को सप्लाई दे दी। लेकिन इसकी सैंपल रिपोर्ट अब आई है। इनके अलावा कई सार्वजनिक नलों से लिए गए सैंपल भी असंतोषजनक पाए गए हैं। सबसे ज्यादा नल खलीनी इलाके के हैं। इनमें सूद भवन भगवनी नगर, गुलेरिया हाउस भगवती नगर, कालीमाता मंदिर खलीनी और पंछेता सार्वजनिक नल के सैंपल खराब आए हैं। हालांकि, कंपनी ने छह जुलाई को पेयजल टैंकों के दोबारा सैंपल भरे थे जिनकी रिपोर्ट सही आई है।
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पिछले हफ्ते भी फेल हुए थे सैंपल
तीन जुलाई को रिज टैंक, जाखू रोपवे टैंक, संजौली और कसुम्पटी रिजोरवायर से लिए गए पेयजल सैंपल भी फेल हो गए थे। इनके अलावा रुल्दूभट्ठा के कई सार्वजनिक नलों में भी दूषित पानी की सप्लाई का पता चला था। पेयजल कंपनी के अनुसार गाद आने से कई सैंपल फेल हुए हैं। लोगों की परेशानी यह है कि उन्हें अब पीने लायक पानी भी नसीब नहीं हो रहा है।
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दूषित पानी की सप्लाई से लोगों की बढ़ी परेशानी
शहर में कई टैंकों और सार्वजनिक नलों के सैंपल फेल होने से शहरवासियों की चिंता बढ़ गई है। अभी बरसात शुरू ही हुई है और पेयजल टैंकों के सैंपल फेल होने का सिलसिला शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में यह समस्या बढ़ सकती है। गिरि खड्ड के किनारे अवैध डंपिंग के कारण न सिर्फ पंपिंग ठप हो रही है बल्कि पानी में दूषित तत्व भी मिल रहे हैं।