शहरवासियों को येलो लाइन पार्किंग की सुविधा देने और अवैध पार्किंग रोकने में नगर निगम इतना लापरवाह है कि अब मुख्यमंत्री तक के आदेश नहीं मान रहा। शहर में येलो लाइन लगाने के लिए सदन के फैसले के मिनट्स तैयार होने का इंतजार हो रहा है। महज एक एजेंडे पर करवाए गए स्पेशल सदन को छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन येलो लाइन लगवाना तो दूर, निगम इसके मिनट्स की फाइल ही तैयार नहीं करवा पा रहा है।
निगम में चुने हुए नुमाइंदों के पास इतना वक्त नहीं कि इसकी फाइल तैयार करवाकर जनता को राहत दें। एक जुलाई को खलीनी बस हादसे के बाद बुलाई आपात बैठक में सीएम जयराम ठाकुर ने जिला प्रशासन और नगर निगम को तुरंत येलो लाइन पार्किंग की व्यवस्था करने के आदेश दिए थे। निर्देश थे कि दो जुलाई की शाम तक येलो लाइन पार्किंग नोटिफाई कर दी जाए। नगर निगम ने उस समय तो गंभीरता दिखाई और अगले ही दिन स्पेशल हाउस बुलाकर येलो लाइन पार्किंग को मंजूरी दे दी।
लेकिन इसके बाद आम जनता से जुड़े इस मुद्दे पर फिर काम करने की जहमत नहीं उठाई। अब हालत यह है कि नगर निगम ने सदन के मिनट्स तैयार करने में ही छह दिन लगा दिए हैं। जब तक महापौर सदन के फैसले के मिनट्स मंजूर नहीं करेंगी, तब तक यह मामला जिला प्रशासन को नहीं जाएगा। साथ ही तब तक शहर में येलो लाइन भी नहीं लग पाएगी।
11533 वाहनों की सुविधा अभी फाइलों में ही
नगर निगम ने येलो लाइन पार्किंग के जरिये शहर में 11533 वाहनों को पार्किंग की सुविधा देने का प्लान बनाया है। येलो लाइन नगर निगम, एनएच और लोक निर्माण विभाग की सड़क पर लगाई जानी है। लेकिन अभी तक यह लाइन फाइलों में ही है। सड़क पर जनता के चालान कट रहे हैं। अवैध पार्किंग के कारण हुए खलीनी हादसे के बाद निगम को सबक लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा ढीला रवैया समझ से परे है। जब सीएम के आदेश ही नहीं मानेंगे तो भला आम जनता के काम कैसे होंगे।
मेयर बोलीं, अभी तैयार हो रहे मिनट्स
महापौर कुसुम सदरेट ने कहा कि सदन के फैसले के मिनट्स तैयार किए जा रहे हैं। दावा किया कि सोमवार तक इसे मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद जल्द ही येलो लाइन लगाने का काम शुरू करवा देंगे।
प्रशासन बोला, निगम ने नहीं भेजा प्रस्ताव
अभी हमें नगर निगम से येलो लाइन पार्किंग को लेकर लिए गए फैसले का प्रस्ताव नहीं मिला है। इसके मिलने के बाद ही कोई फैसला ले पाएंगे।
अमित कश्यप, उपायुक्त शिमला