खाली हुए दफ्तर को कब्जाने के लिए
एमसी और डीसी ऑफिस में मारामारी
पेयजल कंपनी का खाली हो रहा दफ्तर बना विवाद का अखाड़ा
अपनी-अपनी फाइलें लेकर दोनों महकमों के कर्मचारियों ने डाला डेरा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। उपायुक्त कार्यालय परिसर में पेयजल कंपनी के खाली हो रहे दफ्तर को कब्जाने के लिए नगर निगम और डीसी ऑफिस के बीच मारामारी शुरू हो गई है। हालत यह है कि कंपनी ने अभी कार्यालय खाली भी नहीं किया कि दूसरी शाखा के कर्मचारी फाइलें लेकर यहां बैठना शुरू हो गए हैं।
उपायुक्त कार्यालय कहीं इस दफ्तर को वापस न ले लें, इस डर से नगर निगम ने कंपनी कर्मचारियों के शिफ्ट होने से पहले ही टैक्स शाखा का सामान यहां रख दिया है। टैक्स के कई कर्मचारी बैठना भी शुरू हो चुके हैं। दरअसल, टाउनहॉल से शिफ्ट होने के बाद से वर्तमान नगर निगम का आधा दफ्तर उपायुक्त कार्यालय परिसर में चल रहा है। हाल ही में नगर निगम से पेयजल कंपनी अलग होने के बाद इसके दो दफ्तर यूएस क्लब शिफ्ट हो रहे हैं। खाली हुए दफ्तर को उपायुक्त कार्यालय वापस लेना चाहता है जबकि एमसी इसे वापस देने को तैयार नहीं। कुछ दिन पहले जैसे ही पेयजल कंपनी का पहला दफ्तर शिफ्ट हुआ, निगम ने गुपचुप यहां स्वास्थ्य अधिकारी का सामान रख दिया। इस पर उपायुक्त कार्यालय ने भी आपत्ति जताई। डीसी ऑफिस प्रशासन इस दफ्तर में अपने एक अधिकारी को शिफ्ट करने की योजना बना रहा था।
सामान लेकर दफ्तर में
बैठ गए दूसरे कर्मचारी
शिमला। एमसी ऑफिस के टॉप फ्लोर में चल रहे पेयजल कंपनी के दूसरे कार्यालय को भी यूएस क्लब शिफ्ट किया जा रहा है। निगम खाली हो रहे इस दफ्तर को वापस नहीं देना चाहता। शुक्रवार को नगर निगम की टैक्स शाखा के कर्मचारी सामान लेकर इस शाखा में पहुंच गए। यहां पहले से कंपनी की जलशाखा के कर्मचारी बैठे थे। जो कुर्सियां खाली थी, वहां टैक्स के कर्मचारी बैठ गए। सामान दफ्तर के बीच में रख दिया। जलशाखा के कर्मचारियों ने आपत्ति जताई कि आखिर जब अभी शाखा शिफ्ट नहीं हुई तो कैसे दूसरी शाखा के कर्मचारी यहां बैठ सकते हैं।