जिला उपभोक्ता फोरम शिमला ने नौकरी दिलाने वाली गाजियाबाद की एक निजी कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया है। कंपनी आवेदक को सेवाएं मुहैया नहीं करवा पाई थीं। इसके बाद शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। फोरम ने फैसला सुनाते हुए 15 हजार रुपये जुर्माने के साथ सेवा के बदले वसूली गई 24,935 रुपये की राशि को 45 दिन में प्रार्थी को लौटाने के आदेश दिए हैं। अदालत ने वसूली गई राशि को सालाना नौ फीसदी ब्याज के साथ लौटाने को कहा है।
फोरम के अध्यक्ष न्यायाधीश एससी कैंथला, सदस्य सबनीत सिंह चौहान और योगिता दत्ता ने न्याय के लिए प्रार्थी रहे फतैची टुटू निवासी भारत भूषण की शिकायत पर यह फैसला सुनाया। प्रार्थी का आरोप है कि उसने निजी कंपनी के पास मैकेनिक्ल इंजीनियर की नौकरी दिलवाने के लिए आनलाइन आवेदन किया था। इसके लिए उसने मांग के अनुरूप 24,935 रुपये भी अदा किए। लेकिन कंपनी ने नौकरी नहीं दिलवाई। इसके बाद कंपनी को लीगल नोटिस भिजवाया बावजूद इसके कंपनी उसे सेवाएं प्रदान करने में नाकाम रही।
इस पर प्रार्थी ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत की। फैसला सुनाते हुए फोरम ने कंपनी को 45 दिन के भीतर आवेदनकर्ता को वसूल की राशि नौ फीसदी सालाना ब्याज के अलावा शिकायतकर्ता की मानसिक परेशानी की एवज में दस हजार जुर्माना और पांच हजार रुपये लीटीगेशन चार्जिज के रूप में अदा करने के आदेश कंपनी को दिए हैं।