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टैंकों में गंदा पानी है तो मोबाइल पर आएगा अलर्ट, मिलेगा शुद्ध पेयजल

Wed, 22 May 2019 12:07 PM IST
शिमला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
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शहरवासियों को सप्लाई किया जाने वाला पीने का पानी कितना शुद्ध है, इसका पता अब तुरंत चल सकेगा। पानी में क्लोरीन की मात्रा कम या ज्यादा होने पर लोगों को दूषित पानी नहीं पीना पड़ेगा। शहर के 47 पेयजल टैंकों में क्लोरीन सेंसर लगाने का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। अब तक 30 टैंकों में सेंसर लग चुके हैं जिनमें से 21 चालू कर दिए गए हैं। बाकियों के लिए भी बिजली के कनेक्शन लेने की प्रक्रिया चल रही है। इनका कंट्रोल रूम संजौली स्थित पेयजल कंपनी के कार्यालय में बनाया जा रहा है।

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पेयजल कंपनी का दावा है कि इसी महीने से सेंसर की मदद से पानी की आनलाइन मॉनिटरिंग शुरू हो जाएगी। अभी तक कंपनी के पास ऐसी कोई तकनीक नहीं थी जिससे तुरंत पता चल सके कि पानी में क्लोरीन की कितनी मात्रा है। सैंपल के जरिये क्लोरीन की मात्रा का पता दो तीन दिन बाद चलता था। तब तक लोगों को पानी की सप्लाई हो जाती थी। नई तकनीक से अब पानी में क्लोरीन की मात्रा का तुरंत पता चल सकेगा। कंपनी दूषित पानी की सप्लाई को रोक सकेगी।

ऐसे काम करेगा क्लोरीन सेंसर
स्टोरेज टैंकों में लग रहे क्लोरीन सेंसर कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे। यह हर घंटे बाद पानी में क्लोरीन की मात्रा की रिपोर्ट देंगे। पानी में निर्धारित मात्रा से कितना ज्यादा या कम क्लोरीन मौजूद है, इसकी सटीक जानकारी मिलेगी। जरूरत पड़ने पर कंपनी इसे ठीक कर सकेगी। दूषित पानी होने पर सेंसर अलार्म अलर्ट भी देंगे। मोबाइल ऐप के जरिये ये अलर्ट कंपनी के अधिकारियों को मिलेंगे जिससे दूषित पानी की सप्लाई को रोका जा सकेगा।
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पेयजल वितरण पर भी रहेगी नजर
सेंसर टैंकों में पानी के लेवल की भी रिपोर्ट देंगे। इससे कंपनी को शहर में एक समान पेयजल वितरण करने में मदद मिलेगी। कंपनी के एजीएम विजय गुप्ता ने कहा कि सेंसर लगाने का काम अंतिम चरण में है। इससे लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया करवाने में मदद मिलेगी।

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