अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। डेंटल कॉलेज शिमला के 50 प्रशिक्षुओं ने कॉलेज प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन पर 1200 से 3600 रुपये की परीक्षा फार्म भरने पर लेट फीस वसूलने का आरोप लगाया है। इन प्रशिक्षुओं का आरोप है कि जनवरी 2017 में 24 जनवरी को कॉलेज प्रशासन ने उन्हें सूचित किया कि वे परीक्षा फार्म भरें। उन्होंने तय फीस के साथ परीक्षा फार्म भरे, मगर 11 फरवरी को उन्हें कॉलेज प्रशासन ने लेट फीस अदा करने पर ही परीक्षा रोलनंबर देने की बात कही। कॉलेज प्रशासन ने उनसे 1200 से लेकर 3600 रुपये तक की फीस वसूली, जिसे बाद में विवि से वापस मिल जाने की बात कही गई। आज तक उन्हें यह फीस वापस नहीं मिली है। डिटेंड केस के इन प्रशिक्षुओं अनिल आस्टा, अमित वर्मा, पूनम नेहा, शीना, कनिका ठाकुर, आयुषी, तरूनम, सोनी, निधि, अनुज कश्यप, प्रतिभा धीमान, कल्पना नेगी, नेहा कुमारी, सुशील कुमारी, निधि सांख्यान सहित अन्य प्रशिक्षुओं का आरोप है कि परीक्षा फार्म भरने की अंतिम तिथि और इस संबद्ध में सूचना देने की जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन की होती है। उन्हें इस बारे पहले सूचित नहीं किया गया। जब उन्हें सूचित किया गया तो उन्होंने परीक्षा फार्म तय फीस के साथ भर दिए थे। फार्म भरने में हुई देरी के लिए कॉलेज प्रशासन और विवि प्रशासन जिम्मेदार है, उसका खामियाजा छात्रों को इतनी भारी भरकम फीस देकर चुकाना पड़ा। उनका आरोप है कि विवि ने भी उन्हें इस संबद्ध में कोई सूचना नहीं दी। इसलिए इन प्रशिक्षुओं ने कॉलेज और विवि प्रशासन से लेट फीस के नाम पर की गई वसूली की रकम को वापस किए जाने की मांग की है।
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विवि ने जारी की थी अधिसूचना : डॉ. नेगी
विवि के परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी का कहना है कि जून 2016 में एमबीबीएस और बीडीएस का अकादमिक शेडॅयूल विवि ने अधिसूचित कर वेबसाइट पर उपलब्ध करवाया था। जिसे छात्र भी देख सकते थे। वहीं परीक्षा फार्म भरने की अंतिम तिथि और पात्रता से संबंधित अधिसूचना भी विवि ने वेबसाइट पर दी थी। वहीं संबंधित कॉलेजों को प्रेषित की गई थी। विवि ने फार्म भरने में हुई देरी पर ही तय नियमों के तहत लेट फीस जार्ज की थी। छात्र और कॉलेज स्तर पर चूक रही होगी। उनके पास फिलहाल ऐसा कोई मामला नहीं आया है।