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हिमाचल में 117 नई ट्राउट इकाइयों की स्थापना को मंजूरी: वीरेंद्र कंवर

Thu, 07 Jun 2018 10:23 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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राज्य में 15 ट्राउट हैचरियों व 117 नई ट्राउट इकाइयों की स्थापना की जाएंगी। केंद्र सरकार ने नील क्रांति के तहत इन इकाइयों की स्थापना के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। 

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यह जानकारी ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पशुपालन व मत्स्य पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने दी। उन्होंने कहा कि नील क्रांति योजना के तहत सामान्य वर्ग को 40 फीसदी जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला वर्ग को 60 फीसदी दर से अनुदान सहायता प्रदान करने का प्रावधान रखा गया है।

अनुमानित लागत पर अनुदान की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डाली जाएगी। मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को नील क्रांति योजना के तहत पिछले वर्ष प्रस्ताव भेजे गए थे जिनका अनुमानित बजट 1342.96 लाख रुपये था, जिसमें 682.77 लाख रुपये केंद्र का भाग था, जो कि इस वित्त वर्ष में जारी किया गया है।

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इन जिलों में स्थापित होंगी ट्राउट इकाइयां

इस राशि में से कुल्लू, मंडी, शिमला, चंबा और किन्नौर के अतिरिक्त कांगड़ा व सिरमौर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्राउट इकाइयों की स्थापना व अन्य कार्यों पर 542.470 लाख रुपये की राशि व्यय की जाएगी। 

इससे बेरोज़गार युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर सृजित होंगे। वीरेंद्र कंवर ने कहा कि एक ट्राउट इकाई के निर्माण पर 4.50 लाख रुपये व्यय किए जाते हैं तथा ट्राउट हैचरी के साथ लाभार्थी को 3 ट्राउट यूनिट दिए जाने प्रस्तावित है। 

इसके लिए सामान्य वर्ग को 15.48 लाख रुपये व अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला वर्ग को 23.10 लाख रुपये अनुदान के रूप में प्रदान किए जाएंगे। 
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पात्र लाभार्थियों जल्द मिलेगी राशि

ट्राउट हैचरी तथा ट्राउट इकाइयों के पात्र लाभार्थियों का चयन किया जा चुका है और जल्दी ही इन्हें स्वीकृत राशि प्रदान की जाएगी। मंत्री ने कहा कि वर्ष 2018-19 के लिए भी केंद्र सरकार को कुल 1083.82 लाख रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।

इन योजना के तहत राज्य में कार्प तालाब व ट्राउट इकाइयों के निर्माण के अतिरिक्त आहार संयंत्र, मच्छली विक्रय केंद्र व प्रशिक्षण केंद्र आदि के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा गया है।

इस राशि में से कुल 596.706 लाख रुपये केंद्र द्वारा प्रदान किए जाने की संभावना है। वीरेंद्र कंवर ने बेरोजगार युवाओं से आह्वान  किया कि वे आत्मनिर्भर बनने के लिए मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं के साथ जुड़े तथा अपनी आर्थिकी सुधारे। 
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