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प्रचंड गर्मी में तपा सिरमौर, पसीने से तर-बतर लोग

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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
ग्लोबल वार्मिंग और औद्योगिक विकास से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है। यही वजह है कि मौसम चक्र भी गड़बड़ा गया है। गर्मी में अधिक गर्मी और सर्दी में अधिक सर्दी का एहसास हो रहा है। इन दिनों प्रचंड गर्मी की तपिश से सिरमौर झुलस रहा है। सबसे अधिक गर्मी औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब और पांवटा साहिब में पड़ रही है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। नाहन शहर के अलावा निचले क्षेत्र रविवार को सुनसान रहे। सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही भी काफी कम रही। शहर के कई हिस्सों में सड़क पर तारकोल तक पिघलकर दिखने लगी है। वहीं लू के थपेड़ों ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
रविवार को कालाअंब व पांवटा साहिब का अधिकतम तापमान 41 के करीब पहुंच गया। जबकि, सतौन व ददाहू का तामपान 39.8 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके अलावा नाहन का तापमान 38 डिग्री दर्ज किया गया। दिनभर लोग अपने घरों में ही दुबके रहे। मैदानी क्षेत्रों में लू के थपेड़ों के चलते लोगों की चहलकदमी भी काफी कम हो गई है। नाहन शहर में दिनभर लोगों को लू का सामना करना पड़ा। शहर की सड़कें, गलियां, चौराहे सब सुनसान हो गए। झुलसा देने वाली गर्मी से बचने के लिए कई जगह लोग पेड़ की छांव के नीचे बैठेे नजर आए तो कई लोगों ने घरों के भीतर पंखे, कूलर व एसी के सहारे दिन बीताना उचित समझा।
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उधर, मौसम विभाग के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि पांच जून के बाद बारिश के आसार बन रहे हैं। इससे लोगों को थोड़ी बहुत राहत मिलेगी।
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आईसक्रीम व ठंडा पेय का सहारा
बीते कुछ दिन से मैदानी इलाके प्रचंड गर्मी से तप रहे हैं। दोपहर, सुबह व शाम तो गर्मी अपनी प्रचंड रुप दिखा ही रही है। रात के समय भी तापमान लोगों को परेशान कर रहा है। प्रचंड धूप व गर्मी से बचने के लिए लोग आइसक्रीम व ठंडा पेय पीकर गर्मी से राहत पाने के प्रयास कर रहे हैं। दुकानों व खुले आसमान तले बेची जा रही आइसक्रीम की रेहड़ी आदि स्थानों पर बच्चों व लोगों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। वहीं गन्ने के जूस का भी भरी गर्मी से राहत पाने का जरिया बना हुआ है।
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बीमारी की चपेट में आ रहे लोग
भारी गर्मी के चलते लोग बीमारी हो रहे हैं। उल्टी व दस्त के अलावा मौसमी बुखार छोटी उम्र के बच्चों के साथ-साथ महिलाओं को अपनी चपेट में ले रहा है। कई मरीज सरकारी अस्पतालों व निजी क्लीनिकों से अपना उपचार कराने में लगे हैं।
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--मैदानी इलाके सुनसान, बाहर निकलना भी मुश्किल
--पांवटा और कालाअंब का तापमान 40 डिग्री के पार
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