अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। टुटीकंडी-मैहली बाईपास सड़क गड्ढों में तबदील हो चुकी है। एनएच प्राधिकरण की ओर से सड़क पर की गई टारिंग डेढ़ साल में जवाब दे गई। सड़क की खस्ताहाल के कारण वाहन चालकों को परेशानियोें का सामना करना पड़ रहा है। विभाग ने साल 2016 में गर्मियों के मौसम में सड़क पर करोड़ों की लागत से टारिंग करवाई थी। यह पूरी तरह से उखड़ गई है।
सड़क पर रोजाना हजारों की संख्या में छोटे और बड़े वाहनों की आवाजाही होती है। सड़क की खस्ता हालत के चलते कई हादसे हो चुके हैं। मौजूदा समय में भी सड़क की हालत दयनीय बनी हुई है। दो पहिया वाहन चालकों के लिए सड़क सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है। बीसीएस से विकासनगर तक सड़क की खस्ताहाल के कारण जाम की समस्या भी बनी रहती है।
टुटीकंडी-मैहली बाईपास सड़क पर टारिंग के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री पर भी सवाल उठ रहे हैं। मात्र डेढ़ साल में ही टारिंग का उखड़ जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
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आधा दर्जन उपनगरों के लोग करते है आवाजाही
बाईपास सड़क से रोजाना हजारों की संख्या में शिमला शहर के करीब आधा दर्जन उपनगरों के लोग आवाजाही करते है। टुटीकंडी, फागली, कनलोग, लालपानी, खलीणी, बीसीएस, कुसुम्पटी, विकासनगर, पंथाघाटी और मैहली के आसपास के हजारों लोग एक जगह से दूसरी जगह और शिमला शहर आने जाने के लिए इसी बाईपास से आवाजाही करते हैं। सड़क की खस्ताहाल के कारण इन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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एनएचएआई के हवाले की सड़क
सोलन से किन्नौर तक पूरी सड़क की देखरेख पहले एनएच प्राधिकरण करता था। अब कंडाघाट से ढली तक सड़क को एनएच ने एनएचएआई के हवाले कर दी है। अब इस सड़क का पूरा जिम्मा इसी विंग के पास है।
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जल्द होगी टेंडर प्रक्रिया शुरू : स्वामी
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर समरमल स्वामी ने बताया कि सड़क पर पड़े गड्ढों को भरने के लिए पैचवर्क और सड़क किनारे नालियों को साफ करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है, जल्द टेंडर कर सड़क की मरम्मत की जाएगी।