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चेयरमैन के पद के दावेदार

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अमर उजाला ब्यूरो
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शिमला। जिले से भाजपा के केवल तीन विधायक जीत हासिल करने में कामयाब हुए हैं। शिमला को एक मंत्री पद मिलना तय है लेकिन इसके साथ ही कई भाजपा नेताओं को निगम और बोर्ड में चेयरमैन का तोहफा भी मिल सकता है। चेयरमैन का पद चाहने वालों में जिला शिमला में एक लंबी फेहरिस्त है। कुल आठ विधानसभा क्षेत्रों में से हर विधानसभा क्षेत्र से औसतन 5 से 7 नेता खुद को सशक्त दावेदार मान कर चल रहे हैं। इनमें से अधिकांश ऐसे हैं जो टिकट की दौड़ में थे और उन्हें टिकट नहीं मिला। नाराजगी जताने के लिए इनमें से कई प्रत्याशियों ने आजाद प्रत्याशी चुनाव ल़ड़ने की भी ताल ठोंक दी थी लेकिन पार्टी के आलाकमान ने उन्हें समझा कर बागी नहीं होने दिया और उन्हें पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में काम करने के निर्देश दिए थे।
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जिला शिमला के दो विधानसभा क्षेत्रों शिमला ग्रामीण और कसुम्पटी में भाजपा ने पैराशूट एंट्री से प्रत्याशी उतारे। बीते पांच साल से जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं को टिकट न देकर नए चेहरों पर दांव खेला जिन्होंने पांच साल में कभी भी भाजपा के लिए कोई काम नहीं किया। शिमला ग्रामीण से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य के खिलाफ भाजपा ने प्रदेश विश्वविद्यालय में कार्यरत डा. प्रमोद शर्मा को भाजपा प्रत्याशी बनाकर सबको चौंका दिया। डॉ. प्रमोद की गिनती मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी लोगों में होती थी। इनके नाम की घोषणा होने पर शिमला ग्रामीण से टिकट के सशक्त दावेदारों को गहरा झटका लगा और शुरूआत में इन नेताओं के समर्थकों ने दबी जुबान विरोध भी किया लेकिन संगठन के आगे किसी की नहीं चली और सभी दावेदार एकजुट होकर पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में काम करने लगे। हालांकि इनकी एक जुटता के बावजूद भी प्रमोद शर्मा सीट निकालने में कामयाब नहीं हो पाए। इसके बावजूद यहां से बोर्ड और निगम में ताजपोशी की चाह पाने वालों की संख्या अच्छी खासी है। आधा दर्जन से अधिक नाम चर्चा में है। इसी तरह कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र से भी बीजेपी ने नए चेहरे पर दांव खेला। यहां से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की करीबी रिश्तेदार विजय ज्योति सेन को भाजपा में शामिल करवाया और उन्हें पार्टी टिकट देकर सबको चौंका दिया। इससे कसु्म्पटी विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश भाजपा नेता नाराज हो गए और कुछ ने आजाद चुनाव लड़ने का भी ऐलान कर दिया। संगठन और पार्टी के आला नेताओं के हस्तक्षेप के बाद ये शांत तो हुए लेकिन यहां से भी भाजपा चुनाव हार गई। अब यहां से भी पांच नेता बोर्ड और निगम में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद की दौड़ में है। इसके अलावा रोहडू , रामपुर और जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र के नेता भी अपनी गोटियां फिट करने में लगे हुए हैं। प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल के चुनाव हारने के बाद अब खुल कर कोई भी दावेदारी नहीं कर रहा है सब को सीएम के लिए नए नाम का इंतजार है। सीएम की घोषणा के बाद सब अपनी लाबिंग में जुट जाऐंगे। मंत्रिमंडल के गठन के बाद बोर्ड और निगमों में ताजपोशी का प्रचलन रहा है इस बार देखना होगा दावेदारों का यह ख्वाब सरकार बनते ही पूरा होगा या फिर उन्हें लंबा इंतजार करना होगा?
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