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ठेकेदार बोले, हम नहीं उठाएंगे जीएसटी का बोझ, जारी रहेगा बहिष्कार

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शिमला। शहर में बरसात के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा। साथ ही करोड़ों रुपये के नए निर्माण कार्य भी नहीं हो पाएंगे। नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों ने टेंडरों का बहिष्कार जारी रखा है।
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ठेकेदारों का कहना है कि वे जीएसटी और ईपीएफ का बोझ नहीं उठाएंगे। सरकार और निगम को यह खर्च खुद वहन करना होगा। नगर निगम ठेकेदार यूनियन और जय मां तारा ठेकेदार यूनियन की शुक्रवार को अहम बैठक हुई। इसमें 100 से ज्यादा ठेकेदारों ने हिस्सा लिया। सबसे पहले जीएसटी पर चर्चा की गई। ठेकेदारों ने कहा कि 12 फीसदी जीएसटी लगने से उन्हें घाटा उठाना पड़ेगा। यह दर काफी ज्यादा है। एस्टीमेट में शामिल न होने से जीएसटी और ईपीएफ का पैसा उन्हें अपनी जेब से भरना पड़ेगा। ठेकेदार इसके लिए कतई तैयार नहीं हैं।
ठेकेदारों ने कहा कि जीएसटी को लेकर निगम और लोक निर्माण विभाग खुद ही स्पष्ट नहीं हैं। अफसर समझ ही नहीं पा रहे हैं कि कैसे और कितना जीएसटी लगाया जाना है। लंबी चर्चा के बाद यूनियन अध्यक्ष पीएन शर्मा ने कहा कि निगम और सरकार जीएसटी को एस्टीमेट में शामिल कर इसका खर्च वहन करे। बैठक की अध्यक्षता कर रहे मुख्य सलाहकार अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि जब तक सरकार और नगर निगम जीएसटी और ईपीएफ से जुड़ी उनकी मांगों को नहीं मान लेते, तब तक टेंडरों का बहिष्कार जारी रहेगा। ठेकेदार यूनियन सोमवार को इस मसले पर नगर निगम मेयर कुसुम सदरेट से भी मुलाकात करने वाले हैं।
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