एसएफआई की राजकीय कन्या महाविद्यालय इकाई का वीरवार को 30वां सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ एसएफआई की जिला छात्रा समन्वयक रजनी ने किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश की सरकारें नवउदारवादी नीतियों को आम जनता पर थोपकर सरकारी क्षेत्र को समाप्त कर निजीकरण करती जा रही हैं। शिक्षा क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा है। शिक्षा के बजट में लगातार कटौती कर शिक्षा का व्यापारीकरण किया जा रहा है।
सरकारी संस्थानों को समाप्त किया जा रहा है जिस कारण आम आदमी, मजदूरों और किसानों को अपने बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है। सम्मेलन में सालभर की संगठनात्मक गतिविधियों की रिपोर्ट को शिक्षा ने सबके समक्ष रखा। एसएफआई की अखिल भारतीय कमेटी के सदस्य रुचिका वजीर ने कहा कि आज सरकार की शिक्षा नीतियों में किए जा रहे छात्र विरोधी बदलावों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष पर उतरने के लिए तैयार रहने की बात कही।
शिमला शहरी अध्यक्ष आकाश, सचिव अनिल ठाकुर, उपाध्यक्ष अनुज और सह सचिव गौरव मेहता ने भी छात्राओं को संबोधित किया। सम्मेलन में 33 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। इसमें शिक्षा खनाल को अध्यक्ष और अंजली ठाकुर सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।
मनीषा, हिमानी, अनु, नितिका, किरण, अदिति, रितिका, पूजा, सिमरन, तृप्ति, शबनम, मीनाक्षी, आकृति, सुजाता, मंजू, मधु, बबली और अदिति चौहान को भी कमेटी का सदस्य बनाया है। नवनिर्वाचित अध्यक्ष ने कहा कि कॉलेज छात्राओं की मूलभूत सुविधा की मांगों को एसएफआई आने वाले समय में पुरजोर तरीके से उठाएगी।