एसएफआई की शिमला शहरी इकाई ने केंद्रीय कार्यकारिणी के आह्वान पर मंगलवार को शहर के कॉलेजों में नई शिक्षा नीति के विरोध में प्रदर्शन किया। कॉलेज इकाई के कार्यकर्ताओं ने संजौली, कोटशेरा, आरकेएमवी और इवनिंग कॉलेज परिसर में नई शिक्षा नीति के प्रारूप की प्रति को फूंककर रोष जताया। कार्यकर्ताओं ने इस नीति को छात्र और शिक्षा विरोधी बताया। कार्यकर्ताओं ने इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
एसएफआई की शहरी इकाई के अध्यक्ष आकाश पालसरा और सचिव अनिल ठाकुर ने बताया कि चार साल में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सुब्रहमण्यम स्वामी की अध्यक्षता तथा बाद में कस्तूरी रंजन की अध्यक्षता में गठित कमेटियों ने इस नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार किया है। इसका एसएफआई शुरू से विरोध कर रही है। इस नीति में छात्रों, शिक्षकों और शिक्षाविदों के सुझाव शामिल नहीं किए हैं। नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार होने के बाद भी सरकार ने बुद्धिजीवियों और छात्र तथा अध्यापक संगठनों को इस पर चरचा तक को नहीं बुलाया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। नई नीति में पाठ्यक्रम तैयार करने से लेकर डिग्री वितरण और फंड मोबलाइजेशन की खुली छूट दी जा रही है। इसके अलावा इस नीति में सरकारी शिक्षण संस्थानों को राज्य की ओर से आर्थिक सहयोग को न्यूनतम करने और अपने स्तर पर आय स्रोत सृजित करने को बाध्य किया जाना शामिल है। इसका सीधा असर छात्रों पर बढ़ी फीस और शुल्क के रूप में पड़ना तय है।
सामाजिक शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को दी जाने वाली सारी सुविधाएं खत्म कर दी जाएंगी। प्रवेश परीक्षाएं नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के जरिये होंगी। पालसरा ने दावा किया कि इस शिक्षा नीति के प्रारूप के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा आयोग का गठन होना है, जो सभी राज्य के विवि का नियंत्रित करेगा। भारतीय संविधान के अनुसार इस तरीके के राष्ट्रीय आयोग का गठन देश के संघीय ढांचे के खिलाफ है।
यह केंद्र सरकार का शिक्षा व्यवस्था को केंद्रीकृत करने का प्रयास होगा। राज्यों की शिक्षा नीतियों का भगवाकरण करने की साजिशें रचने का हथियार साबित होगा। सचिव अनिल ठाकुर ने कहा कि नई शिक्षा नीति में एनआरएफ के माध्य्म से मिलने वाली छात्रवृत्ति मेरिट के आधार पर दी जाएगी। अभी तक आरक्षण सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन आधार पर दिया जाता है। छात्र नेताओं ने नई शिक्षा नीति में पूर्व छात्रों, शिक्षकों और शिक्षाविदों के सुझावों को शामिल करने का आह्वान किया है। धमकी दी कि यदि ऐसा न किया तो एसएफआई उग्र होगी और इस नीति का विरोध करेगी।