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किन्नौर विधायक प्राथमिकता

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जनजातीय सलाहकार समिति का हो गठन : जगत
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विधायक ने वन संरक्षण नियमों को निरस्त करने की अवधि को बढ़ाने का मुद्दा उठाया
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला।
किन्नौर विधानसभा क्षेत्र के विधायक जगत सिंह नेगी ने विकासात्मक मामलों को उठाने के लिए जनजातीय सलाहकार समिति का गठन करने का आग्रह किया। नेगी ने लोगों को नौतोड़ भूमि प्रदान करने के लिए वन संरक्षण नियमों को निरस्त करने की अवधि को बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नौतोड़ के 15000 मामले लंबित पड़े हैं।
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कहा कि हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में वर्ष 2016 से 2018 तक वन संरक्षण नियमों में छूट दी गई है और नौतोड़ प्रदान करने के लिए कुछ ही समय शेष है। उन्होंने आग्रह किया कि वन संरक्षण नियमों को निरस्त करने की अवधि को 2019 तक बढ़ाया जाए, ताकि लोगों को नौतोड़ प्रदान कर राहत दी जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत बजट जारी करने का मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाना चाहिए। तकनीकी आधार पर इस कार्यक्रम से बाहर किए गए कुछ गांवों को फिर इसमें शामिल करना चाहिए, क्योंकि इन गांवों में इस कार्यक्रम के तहत कई विकासात्मक परियोजनाओं का कार्यान्वयन चल रहा है। उन्होंने क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग तथा सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग को सीमेंट, पाइपें तथा बारूद इत्यादि सामग्री की आपूर्ति के लिए भी आग्रह किया। कहा कि प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के अंतर्गत सभी विभागों ने पूर्ण विस्तृत परियोजना रिपोर्ट केंद्र को सौंप दी है। लेकिन अभी तक कोई भी राशि प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बाढ़ के दौरान कुछ गांवों के लिए खतरा साबित होने वाली बास्पा नदी के तटीकरण का भी आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत सरकार की उड़ान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के तहत किन्नौर, काजा, लाहौल-स्पीति, पांगी तथा भरमौर के जनजातीय क्षेत्रों को शामिल किया जाना चाहिए। नेगी ने सुझाव दिया कि कार्य कर रहे ठेकेदारों को एक समय में केवल दो निविदाएं ही आवंटित की जानी चाहिए तथा उनके द्वारा पूरे किए गए कार्याें पर संतोष होने के बाद ही तीसरा कार्य सौंपे जाने के बारे में विचार किया जाना चाहिए।
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