आठ साल से बिन पढ़ाई के बंट रही बीकाम की डिग्री
रामपुर। कामर्स का संकाय तो खोल दिया गया,लेकिन शिक्षकों की तैनाती करना उच्च शिक्षा विभाग भूल गया। यही वजह रही कि आठ साल बाद भी यहां बिना शिक्षक के ही पढ़ाई ही नहीं हो रही है बल्कि छात्राओं को डिग्री भी बांटी जा रही है। यह तस्वीर है राजकीय महिला डिग्री कालेज में बीकाम संकाय की। यहां पर उधार के शिक्षकों के सहारे ही पढ़ाई की औपचारिकता को पूरा कराने की कोशिश हो रही है,लेकिन यह वैकल्पिक व्यवस्था भी पूरी तरह ठप पड़ी है।
जिले में उच्च शिक्षा का कम बुरा हाल नहीं है। कहने को तो जिले में चार राजकीय महाविद्यालय हैं,लेकिन बात शहरी क्षेत्र की जाए तो शहर में दो ही सरकारी कालेज हैं। शहर में दो सरकारी कालेज होने के बाद भी उच्च शिक्षा का हाल किसी से छुपा नहीं है। छात्राओं के लिए राजकीय महिला डिग्री कालेज में पढ़ाई कराई जाती है। महिला डिग्री कालेज में वर्ष 2008 में कामर्स की पढ़ाई की शुरुआत की गई थी। उस वक्त बीकाम संकाय खोला गया था। बीकाम में 60-60 छात्राओं के दो संकाय संचालित किए जा रहे हैं। यानि कुल मिलाकर बीकाम में 120 सीटों पर छात्राएं शिक्षा ग्रहण करती हैं,लेकिन इनकी पढ़ाई का कालेज में कोई इंतजाम ही नहीं है। डिग्री कालेज में बीकाम की पढ़ाई के लिए कम से कम चार शिक्षकों की तैनाती होनी चाहिए थी,लेकिन शिक्षा विभाग तो संकाय खोल कर बैठ गया,ले किन शिक्षक की तैनाती करना ही भूल गया। आठ साल से बीकाम की पढ़ाई के लिए कोई शिक्षक न होने की वजह से कालेज प्रशासन को राजकीय रजा डिग्री कालेज से वैकल्पिक तौर पर व्यवस्था करनी होती है,लेकिन यह व्यवस्था भी ज्यादा समय तक नहीं चल पाती। फिलहाल बीकाम में एडमिशन लेने से पहले छात्राओं को इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि वह जहां एडमिशन लेने जा रही हैं,वहां शिक्षकों की क्या स्थिति है।