विश्व धरोहर दिवस के मौके पर रेलवे स्टेशन शिमला में 113 साल पुराना स्टीम लोकोमोटिव इंजन एक बार फिर ट्रैक पर उतरा गया। सुबह 11:10 बजे रेलवे शेड से स्टीम इंजन प्लेट फार्म नंबर 01 पर पहुंचा। स्टीम इंजन को देखने के लिए भारी संख्या में सैलानी और स्थानीय लोग रेलवे स्टेशन पहुंचे थे।
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इस मौके पर सैलानियों और स्थानीय लोगों ने स्टीम इंजन को अपने मोबाइल और कैमरों में कैद किया।1905 में पहली बार स्टीम इंजन शिमला-कैथलीघाट के बीच चलाया गया था।
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स्टीम इंजन के प्लेटफार्म पर पहुंचने के बाद विश्व धरोहर दिवस कार्यक्रम शुरू किया गया। शिमला रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक प्रिंस सेठी ने रेलवे स्टेशन स्टाफ को ‘धरोहर शपथ’ दिलाई।
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उन्होंने कहा कि कालका-शिमला रेल लाइन विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त करने वाली तीसरी रेल लाइन है। 8 जुलाई 2008 को यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिया था।
उन्होंने रेलवे के स्टाफ से स्टेशन परिसर में साफ सफाई और रख रखाव के लिए हमेशा तत्पर रहने का आह्वान किया। इस मौके पर रेलवे के वरिष्ठ वाणिज्य निरीक्षक अमर सिंह ठाकुर, डीएमओ अनीता मीणा, एएस नेगी, अनिल छाबड़ा और वाईके चौधरी मौजूद रहे।