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बच्चों की जान से खिलवाड़, स्कूलों को लगा दीं खटारा बसें

Wed, 03 Apr 2019 10:59 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : फाइल फोटो
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शहर में चल रही एचआरटीसी की स्कूल बसों में बच्चों की जान को खतरे में डाला जा रहा है। परिवहन विभाग की ओर से स्कूल बसों के लिए निर्धारित नियमों की एचआरटीसी स्कूल बसों में जमकर अवहेलना हो रही है। एचआरटीसी 10 साल पुरानी बसों का बतौर स्कूल बस संचालन कर रहा है। जेएनएनयूआरएम के तहत शहर को दस साल पहले मिली लाल बसों को रंग बदल कर बतौर स्कूल बस चलाया जा रहा है।

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प्राइवेट और कान्वेंट स्कूलों के लिए बतौर स्कूल बस चलाई जा रही एचआरटीसी बसों के लिए परिवहन विभाग ने नियम तय किए हैं। बतौर स्कूल बस चलने वाली एचआरटीसी बसों में सीसीटीवी कैमरे और अग्निशमन यंत्र लगे होने अनिवार्य हैं। इतना ही नहीं बसों में फर्स्ट एड बाक्स होना भी अनिवार्य है। बावजूद इसके शहर में बतौर स्कूल बस चल रहीं एचआरटीसी बसों में नियमों की जमकर अवहेलना हो रही हैं। हालांकि एचआरटीसी का दावा है कि नई इलेक्ट्रिक बसें बतौर स्कूल बस चलानी शुरू कर दी गई हैं। पुरानी बसों में सीसीटीवी कैमरे नहीं है।

एचआरटीसी स्कूल बसों के लिए यह नियम
- बसों में सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में होने चाहिए
- सीसीटीवी फुटेज का नियमित निरीक्षण होना चाहिए
- बस चालक के पास पांच साल का अनुभव जरूरी
- बस के कंडक्टर के पास वैद्य लाइसेंस होना चाहिए
- चालक परिचालक ड्यूटी के दौरान वर्दी में होने चाहिए
- बस के आगे, पीछे मोटे अक्षरों में ‘ऑन स्कूल ड्यूटी’ लिखा हो
- बसों में 5 किलो के आईएसआई अग्निशमन यंत्र लगे हों
- बसों में छेड़छाड़ रहित स्पीड गवर्नर लगाए गए हों

बस की हुई थी ब्रेक फेल
मंगलवार को एचआरटीसी की एक स्कूल बस की बच्चों को घर छोड़ने के बाद ओल्ड बस स्टैंड जाते हुए टिंबर हाउस के पास ब्रेक फेल हो गई। अगर यह हादसा उस समय होता जब बच्चे बस में सवार थे तो बड़ा नुकसान हो सकता था। यह जेएनएनयूआरएम की 10 साल पुरानी बस थी। पूरी तरह से खटारा बस में सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे थे।

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