शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर छात्रावास के एक कमरे में मंगलवार सुबह लगी आग में सामान जलकर राख हो गया। हॉस्टल के कमरे में रह रहे चिकित्सक के पास सिर्फ पहने कपड़े ही बचे हैं। बाकी कपड़े और लेपटॉप सहित कमरे में रखे शैक्षणिक प्रमाणपत्र जल गए। मंगलवार सुबह करीब सवा चार बजे मालरोड फायर स्टेशन को आग लगने की सूचना मिली।
डॉक्टर भी कमरे के अंदर ही था जिन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया।
माल रोड, छोटा शिमला से अग्निशमन अधिकारी डीसी शर्मा की अगुवाई में चार अग्निशमन वाहनों और एक क्यूआरवी के साथ 18 सदस्यीय दल मौके पर पहुंचा। कर्मचारियों ने एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग को बुझा दिया। इस हॉस्टल में 80 कमरे हैं तथा सभी में चिकित्सक रहते हैं। दमकल कर्मचारियों की मुस्तैदी से इन कमरों को आग की चपेट में आने से बचा लिया गया। आग लगने के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है।
उपमंडलीय अग्निशमन अधिकारी धर्मचंद शर्मा ने बताया कि साढ़े पांच बजे बचाव दल मौके से लौटा। बताया कि जिस समय बचाव दल मौके पर पहुंचा उस समय धरातल मंजिल का यह कमरा पूरी तरह आग की लपटों में घिर चुका था। आग लगने के वक्त चिकित्सक अंदर ही था। डॉक्टर को सुरक्षित निकाल लिया गया है। आग से डेढ़ लाख का नुकसान हुआ है।
अग्निशमन वाहन पहुंचाना हुआ मुश्किल
शिमला। आईजीएमसी के रेजिडेंट छात्रावास में लगी आग को बुझाने के लिए दमकल कर्मियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। अस्पताल के पुराने भवन के बाहर तक जाने वाली मुख्य सड़क पर जगह-जगह निजी वाहनों के पार्क होने से दमकल गाड़ियों को मौके पर पहुंचने में काफी वक्त लगा। अग्निशमन विभाग की टीम को ढाई हजार क्षमता वाले वाटर टेंडर को पहुंचाना भी मुश्किल हो गया था।
लोगों का कहना है कि अग्निकांड अगर बड़ा होता तो भारी क्षति हो सकती थी। पुराने भवन में चल रहे रेडियोलॉजी विभाग और ऊपरी मंजिलों में चल रहे विभिन्न विभागों के वार्ड में यह आग फैल जाती तो इसे काबू पाना मुश्किल होता। नुकसान भी करोड़ों में हो जाता है। अग्निशमन अधिकारी डीसी शर्मा ने मौके तक वाहन पहुंचाने में पेश आई दिक्कतों को देखते हुए उपायुक्त शिमला और एसपी के साथ ही आईजीएमसी प्राचार्य को पत्र लिखकर सारी परेशानी से अवगत करवाया।
फायर फाइटिंग सिस्टम की जांच करवाएं
अग्निशमन विभाग के अधिकारी डीसी शर्मा ने अस्पताल और कॉलेज प्रशासन से पूरे अस्पताल लगाए फायर फाइटिंग सिस्टम तथा उपकरणों की जांच करवाने का सुझाव दिया है। इसकी चेकिंग समय-समय पर की जाती रहनी चाहिए। परिसर में बिछाई गई हाइड्रेंट लाइन को भी चेक करवाने को कहा है।