अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। न्यायालय में 66 दागी अफसरों में कॉलेज के तीन शिक्षकों के नाम शामिल करने पर प्रदेश राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ भड़क गया है। संघ ने आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि यह कॉलेज शिक्षकों की छवि को खराब करने की साजिश है।
संघ के अध्यक्ष राजेश यादव, उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह, महासचिव डॉ. राम लाल शर्मा, सहसचिव डॉ. लक्ष्मी वर्मा, कोषाध्यक्ष डॉ. नीरज शर्मा ने कहा कि दागी अफसरों की सौंपी सूची में कॉलेज के तीन शिक्षकों के नाम डाले गए हैं। जबकि शिक्षा विभाग के उच्च पदों पर बैठे कई अधिकारियों को गंभीर आरोपों के बावजूद सूची से बाहर रखा गया है। उनके खिलाफ जांच भी चल रही है। संघ ने सूची में शामिल किए नामों पर आपत्ति जताई है।
संघ के महासचिव राम लाल शर्मा का कहना है कि संजौली कॉलेज में बरसर(कॉलेज फंड संबंधित मामलों में सहयोगी ) के तौर पर तैनात दो शिक्षकों पर गोलमाल के मामले में कार्रवाई जरूर की गई, मगर इसके लिए असल में जिम्मेदार अधिकारी को सामने लाकर जांच समिति ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई आज तक नहीं की है। इन कॉलेज शिक्षकों पर जांच समिति निराधार आरोप लगा रही है, जो कहीं भी इस मामले सीधे संलिप्त या जिम्मेदार नहीं थे। इस तरह से बिना तथ्यों के दागी की सूची में शामिल कर बदनाम करना गलत है। असल दोषियों को बचाने के प्रयास किए हैं, जबकि उक्त कथित घोटाले का ठिकरा निर्दोश शिक्षकों पर फोड़ा जा रहा है। सरकार अपने चहेतों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने चेताया कि यदि इन शिक्षकों के नाम दागी अधिकारियों की सूची से न हटाए गए तो भविष्य में कोई भी कॉलेज शिक्षक वित्त संबंधित जिम्मेदारी को नहीं लेंगे। एक शिक्षक को सिर्फ समय पर सूचना न मिलने और उसके स्थानांतरण हो जाने के कारण चुनावी ड्यूटी न देने पर दागी की सूची में शामिल किया गया है। सरकार ने इस सूची को जारी कर भ्रष्टाचार की परिभाषा बदलने और न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया है।