अमर उजाला ब्यूरो
शिमला।
ऑनलाइन होने का दावा कर रहा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय बायोमीट्रिक मशीनों से हाजिरी लगाने की व्यवस्था शुरू करने में नाकाम रहा है। राजधानी सहित प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कर्मचारियों और शिक्षकों की उपस्थिति तय समय पर सुनिश्चित करने के लिए बॉयोमीट्रिक मशीनों से हाजिरी की व्यवस्था तीन साल पहले शुरू हो गई है। एचपीयू अब तक इसे शुरू ही नहीं कर पाया है। गैर शिक्षक और शिक्षक संघ लगातार बायोमीट्रिक मशीनों का विरोध कर रहे हैं। इसी के चलते न तो पूर्व कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी और न ही वर्तमान कार्यवाहक कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान ने मशीनों से हाजिरी लगाने की व्यवस्था पर संजीदगी दिखाई। फाइल दब कर ही रह गई। विश्वविद्यालय में कार्यरत करीब आठ सौ से अधिक कर्मचारी और तीन सौ से अधिक शिक्षक अभी भी रजिस्टर में ही हाजिरी लगा रहे हैं। एक बार इस पर ईसी में फैसला जरूर हुआ, जिसके लिए 26 स्थान और उसके मुताबिक मशीनें लगाने के लिए एक कमेटी ने काम भी शुरू किया। उसमें सिर्फ स्थान ही चिन्हित हुए और गैर शिक्षक, शिक्षकों और अधिकारियों के विरोध के कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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शिक्षकों को मंजूर नहीं मशीनों से हाजिरी
प्रदेश सचिवालय में कई सालों से चपरासी से लेकर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी मशीनों से हाजिरी लगा रहे हैं, मगर विश्वविद्यालय में जब मशीनें लगाने का फैसला हुआ तो शिक्षकों ने इसका विरोध किया। इसी विरोध पर गैर शिक्षक कर्मी भी अड़ गए थे कि यदि हाजिरी लगे तो शिक्षक, गैर-शिक्षक दोनों की मशीनों से लगे। बस यही वजह रही कि पूर्व कुलपति के कार्यकाल में ईसी और वित्त कमेटी की मंजूरी के बावजूद मामला आज तक लटका हुआ है।
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नए वीसी के समक्ष मशीनों से हाजिरी लगाने की चुनौती
पूर्व कुलपति और वर्तमान कार्यवाहक कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान के समय में मामला लटका रहा, मगर अब विवि में वीसी के पद पर ताजपोशी होने वाली है। अब नए कुलपति के सामने अपने शिक्षक और गैर शिक्षकों की हाजिरी मशीनों से लगाने की व्यवस्था करने की चुनौती रहेगी।
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विवि के 885 शिक्षक, गैर शिक्षक समस्त अधिकारी आएंगे दायरे में
विश्वविद्यालय में वर्तमान में सेवारत 858 कर्मचारियों में 450 शिक्षक है, जबकि शेष गैर शिक्षक और अधिकारी हैं। बायोमीट्रिक मशीनें लग जाने पर ये सभी इसके दायरे में आएंगे, उन्हें अंगूठा या कार्ड पंच कर ही आफिस में एंट्री और एग्जिट करना पड़ेगा।
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