राजधानी में पढ़ने आने वाले बच्चों को नशे और अन्य विसंगतियों से दूर रखने में अब मकान मालिक मदद करेंगे। भवन मालिक कॉलेजों और अन्य संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। ऐसे में अगर कोई युवा गलत संगत में पड़ जाता है तो समय रहते उसकी काउंसलिंग करवाकर उसे इससे बाहर लाया जाएगा।
यह मुहिम शुरू करने जा रहा है हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के एवॉलाज स्थित यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (यूआईएलएस)। संस्थान कॉलेज छात्रों को नशे से दूर रखने, स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने और संस्थान को रैंगिंग मुक्त बनाने के मकसद से यह पहल शुरू करना जा रहा है। संस्थान के निदेशक ने बुधवार को कैंपस में पीजी संचालकों और निजी भवन मालिकों के साथ संवाद आयोजित किया। इसमें इन भवन मालिकों और पीजी संचालकों से युवा पीढ़ी तथा संस्थान के छात्रों के नशे से दूर रखने में सहयोग मांगा।
निदेशक प्रो. संजय संधु ने भवन मालिकों से कहा कि उनके भवन में किराए पर या पेइंग गेस्ट के रूप में रहने वाले संस्थान के छात्रों की हर गतिविधि पर नजर रखें। यदि उनकी गतिविधियों व्यवहार में कोई बड़ा बदलाव नजर आता है, इस पर संस्थान को इसकी सूचना दें। इसके अलावा छात्रों के अभिभावकों से भी संपर्क किया जा सकता है। जिला प्रशासन द्वारा सभी पीजी संचालकों के लिए संबंधित थाना क्षेत्र और उनके संस्थान को इसकी सूचना और वहां रहने वाले छात्राें का ब्यौरा समय से देने की बात कही। बैठक में विवि के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. कंवलजीत सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के रैगिंग, शारीरिक उत्पीड़न को रोकने और परिसर को इस तरह की की गैर कानूनी गतिविधियों से मुक्त बनाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बनाए कानूनाें और विवि तथा यूजीसी द्वारा जारी किए दिशानिर्देशों के बारे में जानकारी दी। छात्र-छात्राओं के पीजी निजी आवासों में सुरक्षा संबंधित विषय पर उनके आवास मालिकों के साथ चर्चा की गई। इस संवाद और चरचा के सत्र में एंटी रैगिंग समिति के सभी सदस्य, अनुभाग अधिकारी तथा पीजी निजी आवास मालिक मौजूद रहे। अंत में निदेशक ने पीजी और निजी आवास मालिकों को संस्थान की एंटी रैगिंग समिति के सभी सदस्यों के मोबाइल नंबर की सूची प्रदान की।