दिल्ली के स्कूल में बाल यौन शोषण और बच्चे की हत्या की घटना के बाद राजधानी शिमला में भी प्रशासन ने एहतियातन कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मंगलवार को उपायुक्त रोहन चंद ठाकुर ने जिले के समस्त सरकारी और निजी स्कूल प्रिंसिपल से बैठक कर दिशा निर्देश जारी कर दिए है। प्रिंसिपल को निर्देश दिए हैं कि दूसरी कक्षा तक के छात्रों को अकेले शौचालय न भेजा जाए। आया रखी जाए। साथ ही शौचालय के बाद सीसीटीवी कैमरा लगाया जाए। कहा कि स्कूल स्टाफ का भी पुलिस वेरिफिकेशन करवाया जाए। बैठक में प्रिंसिपलों के सुझाव भी लिए गए। कहा कि स्कूलों में बच्चे सुरक्षित रहें, यह सुनिश्चित किया जाए ताकि अभिभावक भी चिंतामुक्त रहें।
उपायुक्त ने प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए कि स्कूल प्रबंधन बाल यौन शोषण पर सभी विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाएं। कहा कि गैर सरकारी स्कूलों में अध्यापकों तथा अन्य सभी कर्मचारियों की नियुक्ति से पूर्व पुलिस द्वारा उनके चरित्र की जांच पड़ताल अवश्य करवाएं। कहा कि अंशकालिक कर्मचारियों के आधार कार्ड व अन्य आवश्यक दस्तावेज जरूर अपने पास रखें। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन बाल यौन शोषण के बारे में सभी विद्यार्थियों को जागरूक करने के विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए। बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी लॉ एंड ऑर्डर हेमिस नेगी, प्रोटोकॉल सुनील शर्मा, उपमंडलाधिकारी, उपनिदेशक शिक्षा तथा गैर सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्य व स्कूल प्रबंधक उपस्थित थे।
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सुरक्षा को उठाए कदमों का एक अक्तूबर को देना होगा ब्यौरा
उपायुक्त रोहन चंद ठाकुर ने स्कूल प्रिंसिपल के साथ हुई बैठक में मुख्य रूप से आठ कदम उठाने को कहा है। कहा कि इस संबंध में उठाए गए कदमों का ब्यौरा एक अक्तूबर तक देना होगा।
स्कूल के टीचिंग, नॉन टीचिंग स्टाफ का पूरा पुलिस वेरिफिकेशन, बच्चों की सुरक्षा को सार्वजनिक स्थानों और शौचालयों के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगाना, स्टाफ और छात्रों के शौचालय की अलग व्यवस्था करना है। साथ ही बाल शोषण, पीओसीएसओ एक्ट की जानकारी अभिभावकों और बच्चों को देना, सीनियर छात्रों के लिए विशेष काउंसलिंग सेशन करने, अभिभावकों को स्कूल टैक्सी चालक की हर जानकारी अपने पास रखने, दूसरी कक्षा तक के बच्चों को शौचालय तक लाने ले जाने को आया की व्यवस्था करने के लिए कहा है।